बिना परीक्षण के लौटे बच्चे
जिलाशिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डाइट में शिक्षा विभाग द्वारा सीडब्लुएसएन बच्चों का चिकित्सकीय मूल्यांकन शिविर आयोजित किया गया। शिविर मंत हटा, पटेरा, बटियागढ विकासखंड के करीब 500 छात्र अपने अपने अभिभावक, शिक्षक के साथ शिविर में पंहुचे। शिविर में आए छात्र अस्थि बाधित, मानसिक विकलांग, दृष्टि बाधित, श्रवण बाधित विकलांग थे। शिविर में छात्रों को सुबह 9 बजे से बुलाया गया था। लेकिन डाॅक्टर दोपहर 1 बजे पंहुचे। नेत्ररोग विशेषज्ञ डाॅ. सुधा राय ने करीब एक घंटा तक मरीजों को देखा, इसके बाद स्थानीय अस्पताल के नेत्र सहायक अरविंद नेमा के द्वारा छात्रों का नेत्र परीक्षण किया गया। इसी तरह अन्य चिकित्सकों के द्वारा छात्रों का परीक्षण किया गया। शिविर में हटा के 168, पटेरा के 99 एवं बटियागढ विकासखंड के 77 छात्रों को विकलांगता मूल्यांकन आंका गया।
100से अधिक छात्र बिना परीक्षण के वापस हुए : शिविरमें आए लगभग सभी छात्रों का अलग अलग काउंटर पर पंजीयन तो किया गया, लेकिन परीक्षण अधिकांश छात्रोंं का नहीं हो सका। तीन विकासखंड में 106 छात्रों को पंजीयन अस्थि बाधिता के लिए पंजीयन हुआ तो 79 छात्रो का मानसिक विकलांगता, 92 छात्रों का पंजीयन श्रवण एवं मूक बधिर में पंजीयन हुआ। 67 छात्रों का पंजीयन दृष्टि बाधिता में हुआ। शिक्षा विभाग के द्वारा प्रस्तुत आंकड़े के पंजीयन के अनुसार है कि परीक्षण के अनुसार। 100 से अधिक छात्र अपने अपने अभिभावकों के साथ बिना परीक्षण के ही वापस चले गये थे। पौड़ी से आए छात्र जीतू के पिता वीरेंद्र आदिवासी ने बताया कि सुबह से शाम हो गई, बेटे का परीक्षण नहीं हुआ तो उसे वापिस ले जा रहे है। भैंसा से आए रामेश्वर, हक्के सेन ने बताया कि मोनू, मोंटी को परीक्षण के लिए लाए थे लेकिन उनका परीक्षण नहीं हो सका। दीनदयाल पांडे , मुकेश पटेल ने बताया कि शिविर के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती है जिसके कारण सभी परेशान होते है। बरी से आई सपना, गीता, मुली, देव, भारती का भी परीक्षण नहीं हो सका। यही हाल मड़ियादो से आये मलखान, दीपक, बहादुर का हुआ। बाली आदिवासी, देवकी यादव, पूरन आदिवासी ने बताया कि बच्चों के परीक्षण में पूरा समय बीत गया, अब कहा जा रहा कि जिला में आना। वापस जाने के लिए भी कोई बस नहीं है। शिविर में पानी के लिए भी सभी तरसते रहे।
बीईओ पीएल तंतुवाय ने बताया कि शिविर में केवल वि