पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • अनुपयोगी साबित हो रहे स्कूलों में बने शौचालय

अनुपयोगी साबित हो रहे स्कूलों में बने शौचालय

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
खेल गतिवििधयों का नहीं िमल रहा लाभ

सरकारी स्कूल के शौचालय का उपयोग नहीं होने से शोपीस बनकर रह गए हैं। शौचालय में ताले लगे हुए हैं।

हटा के सरकारी स्कूलों में खेल शिक्षक नहीं होने से बच्चों में खेल विधा का विकास नहीं हो पा रहा है।

समग्र स्वच्छता अभियान हो रहा फेल

निजसंवाददाता | हटा

हटाब्लाॅक के नगर गांवो में संचालित सरकारी स्कूलों में हजारों रुपए की लागत से बनाए गए शौचालय अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही स्कूलों में बने शौचालयों का आज तक उपयोग नहीं किया गया है। अब इन शौचालयों की हालत यह है कि किसी के दरवाजे गायब हो गए हैं तो किसी में ताला पड़ा है। कुछ शौचालयों में गंदगी है तो कुछ स्कूलों के शौचालय निर्माण होने के बाद आज तक नहीं खुले हैं। उनमें ताला पड़ा-पड़ा जंग खा गया है। शौचालयों का उपयोग होने से स्कूलों के चारों ओर गंदगी पसरी है। इससे शासन द्वारा चलाया जा रहा समग्र स्वच्छता अभियान भी बेअसर साबित हाे रहा है।

ब्लाक की नगर सहित 57 ग्राम पंचायतों में 261 स्कूल संचालित हो रहे हैं। जिसमें 185 प्राइमरी स्कूल, 121 मिडिल स्कूल हैं। इसके अलावा एक दर्जन के करीब हाईस्कूल संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में 60 हजार के उपर छात्र-छात्राए अध्ययनरत हैं। लेकिन विद्यार्थियों द्वारा स्कूलों में बने शौचालयों का आज तक उपयोग नहीं किया गया है। जिससे स्कूलों के आस-पास का माहौल पूरी तरह दूषित हो गया है।

जनपद शिक्षा केंद्र के बीएसी सीपी अहिरवाल ने बताया कि ब्लाक के 71 स्कूलो मंे सर्व शिक्षा अभियान के तहत शौचालय बनाए गए थे। जिसमें एक स्कूल में बने शौचालय की लागत 53 हजार है। बाकी के स्कूलों में समग्र स्वच्छता अभियान के जनपद पंचायत द्वारा ग्राम पंचायत के मार्फत बनाए गए हैं। जिसमें कुछ पूर्ण हैं तो कुछ अपूर्ण हैं। कुछ स्कूलों में निर्माण नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा शालाओं में शौचालय बनवा तो दिए गए लेकिन शौचालयों के रखरखाव, प्रबंधन और साफ सफाई की सुविधा होने से वह किसी काम के नहीं है। वहीं स्कूलों में बाउड्री होने से गांव के लोग शौचालयों को क्षतिग्रस्त देते हैं। इस कारण अधिकतर स्कूलों के दरवाजे गायब हाे गए हैं तो किसी की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई है। उन्होंने बताया कि स्कूलों के शिक्षको को विभिन्न कार्याे के लिए 5 हजार रुपए स्कूल कंटरजेंसी राशि दी जाती है, लेकिन इतनी कम राशि में कुछ नही हो पाता है।



राशिनहीं िमलती

बीईओपीएल तंतुवाय ने बताया कि स्कूलों में बने शौचालयों का रखरखाव सही तरह से होने लगे तो इसका लाभ बच्चों को मिल सकता है। लेकिन इसके लिए शासन द्वारा कोई राशी नही दी जाती है। वहीं गांव के आवारा तत्व इन शौचालयों में पड़ा ताला ताड़कर गंदगी फैला कर चले जाते हैं। इस कारण वह उपयोग लायक नहीं बचते हैं।

ब्लॉक के स्कूलों में पीटीआई शिक्षक की कमी

निजसंवाददाता | हटा

नगरसहित ब्लाक के स्कूलों में पीटीआई शिक्षक की कमी होने से बच्चों को खेल गतिविधियों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि यहां के बच्चो में खेल प्रतिभाएं है। बस जरूरत है तो उनको निखारने की। लेकिन इन्हें निखारने वाले शिक्षक ही स्कूलों में नहीं है। इस कारण बच्चे विभिन्न खेलों में अपना परचम लहराने से वंचित है।

ब्लाक में 185 प्राइमरी स्कूल, 121 मिडिल स्कूल तथा एक दर्जन के ऊपर हायर एवं हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित हो रहे है। जिनमें 50 हजार के करीब छात्र- छात्राएं अध्ययनरत है। इन एक भी स्कूल में खेल शिक्षक नहीं है। इसके साथ ही ब्लाक के कई हाईस्कूलो में पीटीआई शिक्षक के पद स्वीकृत किए गए जाे आज तक नहीं भरे गए। इससे विद्यार्थियों को खेल गतिविधि का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शासकीय उत्कृष्ट स्कूल हटा में पीटीआई के 2 पद, रनेह हाई स्कूल में 1 पद , मढ़ियादो हाई स्कूल में 1, हिनौता हाईस्कूल में 1 पद, फतेहपुर हाईस्कूल में 1 पद स्वीकृत है। जबकि नगर के एमएलबी गर्ल्स स्कूल में एक भी पद स्वीकृत नहीं। इसके साथ ही प्राइमरी एवं मििडल स्कूल में पद स्वीकृत होने के बाद भी एक भी पीटीआई शिक्षक नहीं है। पद स्वीकृत हुए कई साल बीत चुके है लेकिन आज तक इन्हे भरा नहीं गया है। जिससे स्कूलों के बच्चे खेल गतिविधि से वंचित है। गौरतलब है कि आज खेल बच्चों के भविष्य की मुख्य सीढ़ी है। कई ऐसे बच्चे हुए जिन्होंने विभिन्न खेलों के माध्यम अपना परचम लहराया है और स्वयं के साथ देश, प्रदेश एवं जिला का नाम रोशन किया है। लेकिन नगर के शासकीय स्कूलों के बच्चे खेलों से वंचित हैं। क्योंकि उन्हें प्रशिक्षित करने वाले ही शिक्षक ही स्कूलों में नहीं है।

पदखाली

बीआरसीके पीएल तंतुवाय का कहना है कि स्कूलों में संविदा पर पीटीआई शिक्षक की भर्ती की जानी थी लेकिन बाद में शासन ने इसमें रोक लगा दी। इससे पीटीआई शिक्षक के आज भी पद खाली है। उन्होंने बताया कि स्कूलों में बच्चों को विभिन्न खेलों के लिए सामग्री तो मिल जाती है लेकिन खेलों का अभ्यास कराने के लिए किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं है। यदि यह सुविधा हो जाए तो नगर के बच्चे की भी खेल प्रतिभाएं निखर सकती है।