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परिवार तोड़ने का नहीं, जोड़ने का कार्य होना चाहिए: कुशराम परस्ते
भारतएक ऐसा देश है जहां नारी की प्राचीन काल से पूजा होती रही है। हमारी इस धरती को, गाय को भी मां की तरह पूजते है। यह पूजा उनके त्याग, संयम, तप के कारण हो रही है। नारी को धैर्य रखने की बहुत ही आवश्यकता है। क्रोध परिवार को तोड़ते है। पछतावा बाद में होता है। यह बात शुक्रवार को स्थानीय महिला एवं बाल विकास कार्यालय में उषा किरण घरेलू हिंसा पर आयोजित कार्यशाला में एकीकृत बाल विकास परियोजना विभाग की संयुक्त संचालक कुशराम परस्ते ने कही।
उन्होंने कहा कि जब सहनशीलता जवाब दे जाए तो उसके लिए भी कानून बनाए गए है। विधि में इसकी व्यवस्था की गई है। पहले प्राथमिकता परिवार को जोड़ने की होनी चाहिए कि परिवार को तोड़ने की। इस अवसर पर पुलिस उप निरीक्षक जेपी शर्मा ने कहा कि परिवार का संचालन एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में सुपरवाइजर मीना रावत, गीता रजक, चमेली सैनी, सुधा नामदेव ने विभाग के माध्यम से महिलाओं के हितों में चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। घरेलू हिंसा में किस प्रकार से आवेदन देना है, कैसे कार्रवाई आगे बढ़ती इसकी जानकारी महिलाओं को बताई गई। इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।
हटा। कार्यशाला में उपस्थित महिलाएं कार्यकताएं।