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औसत से कम हुई बारिश, पानी रोकने नहीं बनी योजना
इससाल क्षेत्र सहित जिले में औसत से बहुत कम बरसात हुई है। अब पानी गिरने की उम्मीद भी नहीं है। क्षेत्र के नदी नालों में पानी का अभी भी बहाव बना हुआ है। अगामी आठ माह के लिए पानी की क्या व्यवस्था रहेगी, इस बारे में प्रशासन ने कोई योजना पर काम शुरू नहीं किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मई और जून के माह में ग्रामवासियों और मवेशियों को पानी मिल सकेगा यह प्रयास भी अभी तक किसी ने नहीं किया।
मनरेगा के अन्तर्गत इस साल नदी नालों पर छोटे छोटे स्टापडेम निर्माण के लिए भी सम्मलित किया गया है। लेकिन दुर्भाग्य है कि किसी भी पंचायत में पानी को रोकने के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए। नदी नालों को पानी दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है। जमीन का जलस्तर भी पर्याप्त नहीं है। आने वाले समय में पानी की परेशानी का सामना सुनिश्चित करना ही पडे़गा। गांवों में बनाए गए तालाब भी औसतन कम भरे हुए है। जिनसे रवी फसल को ही भरपूर पानी मिल जाए ऐसा संभव नहीं दिख रहा है।
गांवोंमें जल स्त्रोत, लेकिन पानी रोकने का प्रयास नहीं
क्षेत्रके लिए ये अच्छी बात है कि यहां से सुनार, व्यारमा, कोपरा, जूड़ी, बराना, बकराई, कटेहरा जैसी नदी नाला निकले है। इसके अलावा लगभग हर गांव में कोई कोई नाला या जल स्त्रोत ऐसा है जहां यदि पानी को रोकने का प्रयास किया जाए तो कम बरसात होने पर भी गांव के लोगों को पानी के लिए दर-दर भटकना पड़े। सरकार के द्वारा विभिन्न विभागों के माध्यम से नालो पर स्टापडेम बनायें गये, लेकिन ये स्टापडेम कैसे बने इन्हे देखने के लिए के कभी उच्चाधिकारियों को समय नहीं मिला। झगरी में बना स्टापडेम हवा में बना है नीचे पानी निकल रहा है। जहां तहां स्टापडेम में गेट लगाये जाने थे वहां से गेट गायब हो गये जो आज तक अप्राप्त है। मोनू पांडे, नीरज जैन, नंदकिशोर पटेल, राकेश कुशवाहा ने बताया कि कम बरसात को देखते हुए, पानी को रोकने के लिए अभी से प्रयास करने होंगे। अन्यथा गर्मी के दिनों में पानी की त्राहि-त्राहि सुनिश्चित है। एसडीएम राकेश कुशरे ने बताया कि सभी पंचायतों एवं एजेंसियों को पानी रोकेने के निर्देश दिए गए है।
हटा। क्षेत्र के जल स्त्रोतां में इस बार कम पानी है। आने वाले दिनों के लिए पानी रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। पानी लगातार बह रहा है स्टाप डेम बनाए ही नहीं गए।