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57 पंचायतों के मजदूरों को नहीं मिला मेहनताना

7 वर्ष पहले
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जनपदपंचायत हटा क्षेत्र की 57 पंचायतों द्वारा मनरेगा के अंतर्गत गांव वालों को रोजगार उपलब्ध कराया गया था। लेकिन मजदूरों को तीन माह से मजदूरी नहीं दी जा रही है। गौरतलब है मजदूरी का भुगतान होने की दशा में मजदूर को उसकी क्षतिपूर्ति देने का भी प्रावधान है।

सरपंच संघ के अध्यक्ष बाला पटेल ने बताया कि विगत तीन माह में करीब 1 लाख 50 हजार मजदूरी दिवस का भुगतान शेष है। मनरेगा कानून के अंतर्गत यदि पंचायत के द्वारा निर्माण कार्य के मस्टररोल 15 दिवस के अंदर जमा नहीं होते तो पंचायत को जुर्माना देना पड़ता है। जबकि शासन खुद तीन माह से भुगतान नहीं कर रहा है। नयागांव सरपंच कमलेश तिवारी, रमपुरा सरपंच मनीष चौबे, रसीलपुर सरपंच अनुसुइयारानी संतोष पटेल ने बताया कि जिला पंचायत के सभी अधिकारी बार-बार समीक्षा बैठक में कार्य की प्रगति के लिए दबाव डालते हैं लेकिन जब मूल्यांकन और राशि भुगतान का समय आता है तो कोई जवाब नहीं दिया जाता है। पिपरिया किरन की सरपंच आशारानी, निवास सरपंच पल्टनिया, त्यौरईया सरपंच मथुरा प्रसाद ने बताया कि गांव में खेत सड़क के कार्य का, गोट शेड, कपिलधारा कूप, नाली निर्माण, मेड़ बंधान का कार्य, शौचालय निर्माण की मजदूरी का भुगतान तीन-तीन माह से बाकी पड़ा है। अब नया कोई भी कार्य करने से मजदूर मना कर रहे हैं।

पंचायत सचिवों के स्थानांतरण होने से पंचायत के कार्य प्रभावित हो रहे है। ग्रामवासी रोजगार को भटक रहा हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री राजा पटेरिया ने बताया कि लगातार दो फसलें पहले ही खराब हो चुकीं हैं। ऐसी स्थिति में गांववासी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे में सरकार का दायित्व बनता है कि अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराकर समय सीमा में लोगों को लाभांवित करें।