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दुर्दशा का शिकार हो रहा मलेरिया विभाग

6 वर्ष पहले
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नगरसे निकली सुनार नदी के किनारे स्थित पुरानी अस्पताल में संचालित हो रहा मलेरिया विभाग की हालत कंडम हो गई। भवन की छत पूरी तरह उखड़ गई दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई है। अब भवन की हालत यह कि वह कभी भी गिरकर कर्मचारियों को मुसीबत बन सकता है। 10 वाई 10 के कमरे संचालित यह विभाग दुर्दशा का शिकार हो गया है। इसी कमरे बैठकर वहां के कर्मी कार्य करने को मजबूर है। कमरे के भीतर बाहर भारी संख्या में कबाड़ फैला है। यदि किसी भी बीमारी का सेंपल बनाना हो तो कर्मचारी को परिसर में बैठकर बीमारी के सेंपल बनाना पड़ते है। और बाद में उसे सिविल अस्पातल सुरक्षित रखने के लिए भेजा है।

विभाग के सुपरवाइजर राजेश कुमार रैकवार ने बताया कि यहां पर कुल 10 कर्मी कार्यरत है। जिसमे से दो कर्मचारी सिविल अस्पताल में अटैच है। वहीं एक कई माह से नहीं रहा है। बाकी के 7 कर्मी इसी खंडहर कमरे में बैठकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यहां पर पहले अस्पताल थी जो अब चंडी जी मंदिर के समीप पहुंच गई है। यहां पर बना पुरानी अस्पताल का भवन पूरी तरह खंडहर हो गया है। सिर्फ उनका यह कमरा ही बचा जो कभी भी गिर सकता है। चूंकि मलेरिया विभाग होने से उनके उपर जिम्मेदारी बहुत ज्यादा रहती है लेकिन सुविधा के अभाव में वह सही तरह से काम नहीं कर पा रहे हैं। तो यहां पर बैठने की पर्याप्त सुविधा है ही बीमारियों के सैंपल के जांच की। फील्ड वर्कर किशोरीलाल ने बताया कि यदि शासन की विभिन्न योजना के तहत कोई सामान आता है तो उसे रखने की भी सुविधा यहां पर नहीं है।

ब्लाक के कुछ गांव डेंगू, फाइलेरिया, मलेरिया के केस पाए जाने पर सघन अभियान चलाया गया था जिससे वह गए और बीमारी संभावित लोगो के खून के सेंपल वह लेकर आए लेकिन उनको पूरा काम परिसर से करना पड़ा यहां उनको नाम मात्र की सुविधा नहीं है। सुविधा देने के जिला मलेरिया विभाग से कई बार कहा गया लेकिन आज तक किसी भी उच्चाधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया है।