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समस्या : खटारा बसों मंे यात्रा करने को मजबूर हैं यात्री
हटा। बिना फिटनेस के चल रही यात्री बसों में लोगों को परेशानियो से जूझना पड़ रहा है।
निज संवाददाता | हटा
नगरके बस स्टेंड से अन्य जिलों के जाने के लिए सड़कों पर दौड़ रही यात्री बसें परिवहन विभाग द्वारा अनफिट ताे है ही साथ मुसाफिर को कब दगा दे जाए इसकी कोई गारंटी नहीं है। किसी बस की खिड़की में कांच नहीं है तो किसी बस के दरवाजे खराब है। वही चंद रुपए के खातिर कंडक्टर यात्रियों को ऐसे रेलमपेल भरते है मानो मुसाफिर नहीं भेड़ और बकरी हो।
मुसाफिर ऐसी बसों में सफर करने को मजबूर है। इससे ज्यादा खराब हालत ग्रामीण अंचलों में चल रही बसों की है। कई गाव कस्बे ऐसे है जहां पर एक ही बस जाती है और उसका भी समय निर्धारित है। इसलिए यात्री चाहकर भी उसमें जाने को मजबूर है। अब इन कंडम बसों में लोगों के लिए यात्रा करना खतरे से खाली नहीं रह गया है। शहरी ग्रामीण अंचलों में चल रही बसों में झमता से अधिक सवारियां बैठाई जा रही है। मुसाफिर लखन, सीताराम ने बताया की सड़कों पर दौड़ रही अधिकतर बसों में इंजन से ज्यादा खिड़कियों की आवाज आती है। रामलाल गौड़ ने बताया कि वह जिस बस से हटा आए है उसमें इतनी ज्यादा सवारी भरी थी कि शांस लेना भी दूभर हो रहा था। रमेश सिंह ने बताया कि उन्हें एक शादी में शामिल होने के लिए गढ़ाकोटा जाना है। बसों में हाेने वाली भीड़ तथा खराब बसांे में सफर करना मजबूरी है। बस में खड़े-खड़े थोड़ी दूर जाने के बाद इतनी थकान हो जाती है कि जैसे बीमार पड़ गए हो। तेदूखेड़ा से विवाह समारोह से लौटे राजकुमार सिंह ने बताया कि वह जिस से लौटे है उसमें इतने ज्यादा यात्री थे कि खड़े होना भी मुश्किल हो रहा था। वह सफर वामुश्किल में कट पाया। गौरतलब है कि बस स्टेंड से एक सैंकड़ा के करीब बसें संचालित हो रही है। जिसमें अधिकतर बसे कंउम है। इन्हीं कंडम बसों में झमता से अधिक दो गुनी यात्री भरे जा रहे है। जिससे सीट पर बैठे यात्रियों को परेशानी होती है। झमता से ज्यादा यात्रियों के कारण बस सड़क हादसे की आशंका बनी रहती है। स्थानीय निवासी कपिल साहू, रामलाल सिंह, धमेंद्र पटेल ने बताया कि इन बसो की आज तक तो चेकिंग हुई है ही इन पर कार्रवाई। सबसे ज्यादा यातायात नियमो का उल्लघन बस संचालक ही कर रहे है। वहीं पुलिस विभाग भी बस संचालकों पर मेहरबान बना हुआ है।
यहहै नियम और क्या हो रहा है
परिवहनविभाग के नियमों के अनुसार यात्री वाहनों में बीमा, फिटनेस एवं परमिट की जानकारी का पंपलेट बस के आगे चस्पा होनी चाहिए लेकिन सड़कों पर दौड़ रही एक भी बस में यह जानकारी चस्पा नहीं होती है। इसी तरह जिस वाहन की जितने यात्री बैठाने की अनुमति है उतने ही बैठाए जाए तथा उसमें यात्री झमता का उल्लेख भी होना चाहिए। लेकिन बसों मे यात्रियों को झमता से अधिक बैठाया जा रहा है। इसके अलाबा इंजन, टाॅयर, ब्रेक, छप्पर आदि फिट होना चाहिए लेकिन यहां से चलने वाली बसों में इन मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है।
कार्रवाईकी जाएगी
एसडीएमराकेश कुशरे का कहना है िक यदि बस संचालक यातायात नियमों का उल्लंघन कर रहे है और झमता से अधिक यात्री बैठा रहे तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही कंडम बसों की जांच कर उनका परमिट कैंसिल कराया जाएगा। वह नियमों का पालन करते हुए नहीं दिखे तो इस पर भी कार्रवाई की जाएगी।