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181: कॉल कीजिए मगर कार्रवाई की गारंटी नहीं
पूरी गंभीरता से संचालित हो रही सीएम हेल्पलाइन
Ãसीएमहेल्पलाइन में रही शिकायतों का तकरीबन 80 फीसदी तक निराकरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव स्वयं इसकी माॅनीटरिंग कर रहे हंै। कुछ मामले न्यायालयीन या इसी तरह की विशेष परिस्थिति के कारण भले ही रुक जाते हैं, लेकिन हेल्पलाइन पूरी गंभीरता से संचालित की जा रही है। इसमें सभी विभागों की अपनी-अपनी जिम्मेदारी भी तय की गई है और विभागीय मंत्री भी हेल्पलाइन के प्रकरणों को देख रहे हैं। भूपेंद्रसिंहठाकुर- मंत्री, आईटी, जनशिकायत एवं परिवहन
छतरपुर | मां की मौत के बाद भी नहीं आया रिस्पांस
जिलेमें रामगढ़ के सतीश मिश्रा सीएम हेल्पलाइन से किसी तरह की मदद मिलने की बात को सिरे से नकार देते हैं। उनका कहना है कि यह सब बोगस और झूठ है। वे अपना खुद का अनुभव भी बताते हैं। सतीश ने बताया कि उनकी मां विमलादेवी की तबीयत 28 नवंबर 2014 को बिगड़ गई थी। सतीश पिता कैलाशचंद्र मां को जिला अस्पताल ले गए। मां की हालत बेहद गंभीर होती जा रही थी। डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल ग्वालियर मेडिकल कॉलेज रैफर कर दिया। ग्वालियर ले जाने के लिए एम्बुलेंस की जरूरत थी, लेकिन जिला अस्पताल की एम्बुलेंस खराब थी। सतीश ने तत्काल 108 पर कॉल किया। 108 के कॉल सेंटर से बताया केवल झांसी तक ही मरीजों को छोड़ने की व्यवस्था है। उन्होंने इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की। दूसरी ओर से तत्काल मदद का आश्वासन मिला लेकिन देर रात तक एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हुई। समय पर उपचार नहीं मिलने से मां विमला की मौत हो गई लेकिन हेल्पलाइन से अब तक रिस्पांस नहीं आया।
रतलाम | नहीं बनी पात्रता पर्ची
टाटानगरके अनिल सोलंकी ने राशनकार्ड की पात्रता पर्ची नहीं बनाने की शिकायत की। महिला एक्जिक्यूटिव ने कहा- हम बात करते हैं, आप दो दिन बाद खाद्य विभाग पहुंच जाना। अनिल खाद्य विभाग पहुंचे तो कर्मचारियों ने कहा नगर निगम जाओ, पर्ची मिल जाएगी। निगम में बताया पर्ची खाद्य विभाग में मिलेगी। सीएम ऑलाइन पर दोबारा शिकायत की तो कहा गया- प्रतीक्षा करो, पात्रता पर्ची जल्द बन जाएगी।
रतलाम| लोन मिला ही नहीं
त्रिपोलियागेट निवासी प्रमोद कसेरा ने बर्तन कारोबार के लिए आवेदन किया। विभाग ने चार लाख के लोन का प्रस्ताव बैंक को भेजा। लोन नहीं देने पर कसेरा ने सीएम ऑनलाइन पर शिकायत की। दो दिन बाद कॉल आई ‘उद्योग विभाग जाकर मिल लो।’ पहुंचे तो उनसे नया फाॅर्म भरवा दिया। लोन अब तक नहीं मिला है।
उज्जैन| भ्रष्टाचार पर कार्रवाई नहीं
उज्जैन|सेवानिवृत्तरेलकर्मी आरके दीक्षित हेल्पलाइन का नाम आते ही भड़क जाते हैं। वजह दो बार शिकायत के बाद समस्या का हल नहीं होना है। उन्होंने वेदनगर में हुए सीमेंट-कांक्रीट के संबंध में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी ली। भौतिक सत्यापन किया तो भारी गड़बड़ी मिली। पहले नगर निगम फिर सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ।
खंडवा| तीन शिकायतें, तीनों पेंडिंग
मुस्कानचंदानी ने खंडवा के दाहिरसेन वार्ड में मोबइल टॉवर हटाने की शिकायत (क्र.184155) की थी। इन्द्रजीत साहू ने बस स्टैंड पर जानलेवा गड्ढे की समस्या (क्र. 532016) बताई। पंधाना की जीवनबाई की मौत 5 माह पहले हुई थी। बीमा योजना की दूसरी किस्त नहीं मिलने पर शिकायत की गई।
दमोह| पांचवीं बार में निराकरण
दमोह।जिलाअस्पताल परिसर में बॉयो मेडिकल वेस्ट अन्य कचरा खुले में जलाया जा रहा है। इससे फ्रेंड्स कॉलोनी के लोग खासे परेशान थे। कॉलोनी के सुनील नांबयार ने अक्टूबर में 181 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। 10-12 अन्य लोगों ने भी शिकायत की। बावजूद समस्या हल नहीं हुई। नांबयार लगे रहे और पांच बार 181 पर शिकायत की तब कहीं जाकर समस्या हल हुई।
दमोह| नहीं हटाया गया कब्जा
लुकमानचौराहा निवासी योगेंद्र यादव के खेत पर बने मकान को कुछ लोगों ने जेसीबी से ढहा दिया था। कुछ हिस्से पर कब्जा भी कर लिया। शिकायत उन्होंने पुलिस, तहसीलदार, एसडीएम कलेक्टर से की। निराकरण नहीं हुआ तो 181 पर समस्या बताई।
तीन बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन निराकरण नहीं हुआ।
उज्जैन | अफसर ही झूठ बोलते हैं, नहीं करते काम
उज्जैनमें योगेश्वर टेकरी का धार्मिक एवं पुरातात्विक महत्व है। यह शहर का एेसा स्थान है जहां से पूरे शहर को निहारा जा सकता है। इसका मालिकाना हक नगर निगम का है। इस एतिहासिक स्थल की खुदाई कर कुछ लोगों ने दो बीघा जमीन पर स्थाई निर्माण कर लिया है। भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रामसिंह सांखला ने इस मुद्दे को उठाया। उनका कहना है, सीएम हेल्पलाइन में 17 जून 2014 को क्रमांक 69076 से शिकायत की गई। इसके बाद शिकायत क्रमांक 107801 दिनांक 08 अगस्त 2014 को भी दर्ज कराई गई। सीएम हाउस से उनके पास 09 नवंबर 2014 को फोन आया और बताया कि शिकायत क्रमांक 69076 के आधार पर नगर निगम स्थान का सीमांकन करवा कर अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रहा है। सांखला का कहना है कि असलियत में नगर निगम ने इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की और उनकी शिकायत को नस्तीबद्ध कर दिया गया। जाहिर है कि मुख्यमंत्री सचिवालय को झूठी जानकारी दी गई है। सांखला ने 8 जनवरी 2015 को एक बार पुन: सीएम हेल्पलाइन में नगर निगम के भ्रष्टाचार की शिकायत 612337 पर दर्ज कराई। आज तक कुछ नहीं हुआ।
हाेशंगाबाद| बाबू ने दी झूठी जानकारी, सस्पेंड
सोहागपुरजनपद में इंदिरा आवास योजना को लेकर माछा के गुलाबसिंह विश्वकर्मा ने 11 अक्टूबर को हेल्पलाइन पर शिकायत की थी। उन्हें योजना की दूसरी (35 हजार रुपए) का भुगतान नहीं हुआ था। शिकायत के बाद बाबू कमलसिंह ने राशि भुगतान की झूठी जानकारी फीड कर दी। गुलाबसिंह ने दोबारा हेल्पलाइन पर संपर्क किया तो जांच के आदेश हुए। जांच जिला पंचायत सीईओ अभिजीत अग्रवाल ने की तो बाबू की गड़बड़ी पकड़ में गई। बाबू को निलंबित किया गया जबकि प्रभारी जनपद सीईओ एसडीएम नवीत धुर्वे को नोटिस जारी किया।
गलत जानकारी दी
काम नहीं हुआ
शिकायत के समाधान की यह रही पूरी प्रक्रिया
यह दावे किए गए थे
>भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर शिकायतकर्ता को 48 घंटे के भीतर जवाब मिलेगा।
> सामान्य शिकायतों का निराकरण 7 दिन के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा।
> शिकायत अथवा समस्या का समाधान होने पर शिकायतकर्ता को एसएमएस से सूचना दी जाएगी।
> परीक्षण अवधि (जनवरी 2014 से जुलाई 2014) में 1 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 71 हजार से ज्यादा निराकृत हुईं।
> रोजाना 5 से 10 हजार शिकायतें सुनी जाएंगी।
कई जानकारियां
कॉलकरने पर शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
अन्य मदद
शिकायतोंके अलावा 108, 100, 102 जननी एक्सप्रेस उपलब्ध हो सकती है।
यह है फायदा
एककॉल करने पर विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याओं का निराकरण हो सकता है।
यह है उद्देश्य
प्रदेशवासियोंको विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए भटकना पड़े।
4 इसके बाद कमिश्नर स्तर पर शिकायत का निराकरण कराया जाता है।
3 दोनों स्तर पर कार्रवाई हो तो कलेक्टर समकक्ष अधिकारी को शिकायत, समस्या भेज दी जाती है।
2 प्रथम स्तर पर हल निकलने पर वरिष्ठ अधिकारी के पास भेजते हैं।
1 शिकायतें दर्ज करने के बाद कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग प्रमुख के पास भेजी जाती हैं।
खास बातें
1अगस्त
2014 को शुरू हुई थी हेल्पलाइन। (प्रायोगिक तौर पर यह जनवरी 2014 में ही शुरू हो गई थी।
37, 35,369
कॉल अब तक किए गए हैं।
सुबह 7.00
से रात 11.00 बजे तक नि:शुल्क कॉल कर शिकायत या समस्या दर्ज कराई जा सकती है।
5000
अधिकारी-कर्मचारी लोगों की समस्याओं के लिए इससे जोड़े हैं।
भास्कर न्यूज | एमपी-टू
सीएमहेल्पलाइन पिछले साल 1 अगस्त को शुरू हुई थी। शुरुआत में नाली की साफ-सफाई, कचरा उठाने जैसी शिकायतें करने पर तत्काल उनपर काम हुआ। प्रचार-प्रसार ठीक तरह से किए जाने के बावजूद योजना की जानकारी लोगों तक पहुंचने लगी। हेल्पलाइन तक पहुंचने वाली शिकायतों की संख्या बढ़ने के साथ ही अब खुद हेल्पलाइन की शिकायतें बढ़ रही हैं। गंभीर किस्म की ज्यादातर शिकायतों पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा। बल्कि हेल्पलाइन की ही गंभीर शिकायतें सामने आई हैं।
एक समस्या 7-8 बार शिकायत करने के बाद भी हल नहीं हो रही। आपत्ति दर्ज कराने पर हेल्पलाइन के एक्जिक्यूटिव दोबारा कॉल नहीं करने की हिदायत दे रहे हैं। ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें समस्या हल करवाने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों को झूठी जानकारी देकर प्रकरण ही बंद कर दिया गया है। अधिकारी जवाब देने की जल्दबाजी में सिर्फ गलत जवाब भेज रहे हैं, बल्कि गलत जानकारी भी फीड की जा रही है। उज्जैन और होशंगाबाद जिले के सोहागपुर में ऐसा हो चुका है। उज्जैन की एक शिकायत पर मुख्यमंत्री सचिवालय को झूठी जानकारी दे दी गई कि कार्रवाई कर प्रकरण समाप्त किया जा चुका है, जबकि संबंधित विभाग ने ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की। सोहागपुर की एक शिकायत के जवाब में भी बाबू ने पोर्टल पर समस्या हल होने की झूठी जानकारी फीड कर दी। शिकायतकर्ता ने दोबारा हेल्पलाइन पर कॉल किया। जांच में बाबू की फीड जानकारी झूठी पाई गई। उसे निलंबित किया जा चुका है।