सेमेस्टर पद्दति पर छात्रों से लेंगे राय
^सेमेस्टरप्रणाली के बारे में होने वाली वोटिंग को लेकर काॅलेजों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार हमें 29 सितंबर काे वोटिंग करानी है।^ डॉ.कामिनीजैन, प्राचार्यलीड कॉलेज
रिजल्ट में आया सुधार
गर्ल्सकॉलेज के प्राध्यापक डॉ.अरुण सिकरवार की माने तो मुख्य परीक्षा में सीसीई प्रोजेक्ट वर्क के अंक जुड़ने से रिजल्ट में सुधार आया है। साइंस ग्रुप में पहले 30 फीसदी रिजल्ट आता था, अब वह 70 से 80 प्रतिशत रहा है।
प्राध्यापकों पर बढ़ा काम का बोझ
यूजीऔर पीजी कक्षाओं में 2007 से सेमेस्टर प्रणाली चल रही है शिक्षा सत्र में साल में दो बार परीक्षाएं आयोजित किए जाने के कारण पेपर वर्क भी बढ़ा है। इसके कारण प्राध्यापकों को मिलने वाले अवकाश भी बंद हो गए हैं। प्राध्यापकों की मानें तो उनका ज्यादा समय क्लास में पढ़ाने की बजाय जानकारी तैयार करने में लग जाता है। इधर, कॉलेज में स्टॉफ की कमी होना भी एक बड़ी परेशानी है।
नगर संवाददाता|होशंगाबाद
उच्चशिक्षा विभाग अब छात्र-छात्राओं से पूछेगा कि आपके लिए बेहतर कौन सी परीक्षा प्रणाली है। इस मुद्दे पर बीयू के सभी कॉलेजों में संभवत: 29 सितंबर को वोटिंग हो सकती है। जिले के सभी कॉलेजों में इस संबंध में निर्देश भी चुके हैं। सेमेस्टर प्रणाली को लेकर होने वाले इस मतदान की काॅलेज प्रबंधन ने भी पूरी तैयारियां कर ली हैं। इधर, सेमेस्टर प्रणाली को लेकर सभी स्टूडेंट्स की राय भी अलग-अलग है। कुछ छात्र-छात्राएं सेमेस्टर प्रणाली काे जारी रखने पर जोर दे रहे हैं, तो कुछ छात्र-छात्राएं इस प्रणाली के बिलकुल खिलाफ हैं। गर्ल्स कॉलेज की कॉमर्स की छात्रा रिचा शर्मा और शिवानी राय बताती हैं कि सेमेस्टर प्रणाली सबसे बेहतर है। सेमेस्टर परीक्षाओं में कोर्स काफी कम होता है,परीक्षाएं भी काफी लंबी नहीं होती हैं। ऐसे में परीक्षा की तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय मिलता है। दूसरी ओर नर्मदा कॉलेज की छात्रा नेहा पटेल की मानें तो सेमेस्टर प्रणाली ने सभी छात्र-छात्राओं को पूरी तरह से बांध दिया है। इसके कारण पूरे साल छात्र-छात्राएं परीक्षा के अलावा अन्य किसी भी क्षेत्र पर समय नहीं दे पाते हैं। प्राध्यापक भी मानते हैं कि सेमेस्टर प्रणाली से छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणामों में सुधार रहा है।