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विक्रेताओं ने शिक्षा विभाग से पूछा आप ही बताएं कौन सी पुस्तकों का आर्डर दें

7 वर्ष पहले
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प्राइवेटस्कूल अगले सत्र के सिलेबस को लेकर चुप्पी साधे हैं। प्राइवेट स्कूल संचालक चाहते हैं कि स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें ही लागू हों। शिक्षा विभाग ने भी अब तक निजी स्कूलों में सिलेबस निर्धारण के लिए किसी प्रकार के निर्देश भी जारी नहीं किए हैं। जिससे पता चल सके कि प्राइवेट स्कूल एनसीआरटी, एमपी बोर्ड या निजी प्रकाशकों की पुस्तकें चलाएंगे। लेकिन शिक्षा विभाग और निजी स्कूलों की मनमानी से पुस्तक विक्रेता परेशान हैं। हर साल निजी स्कूलों के कहने पर पुस्तकें खरीदने वाले पुस्तक विक्रेताओं ने इस बार शिक्षा विभाग और प्रशासन से पत्र लिखकर पूछा कि आप ही बताएं कि हमें कौनसी पुस्तकों का आर्डर नए सत्र के लिए देना है। जिससे कि बाद में बदलाव हुआ तो हमें नुकसान उठाना पड़े।

गौरतलब है कि हर साल निजी स्कूलों से चलाई जाने वाली पुस्तकों की सूची लेकर पुस्तक विक्रेता दिसंबर अंत तक प्रकाशन समूहों को किताबों का आर्डर दे देते हैं। लेकिन पिछले साल शिक्षा विभाग और निजी स्कूल संचालकों के विवाद के कारण विक्रेताओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। कुछ निजी स्कूलों ने पहले निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लागू कर दी, लेकिन शिक्षा विभाग के आदेश के बाद उन्हें बदल दिया। कुछ बड़े स्कूल संचालकों ने बच्चों के हित वाली एनसीआरटी एमपी बोर्ड की पुस्तकें चलाने का जमकर विरोध किया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने अगले सत्र में निजी स्कूल संचालकों से एनसीआरटी एमपी बोर्ड की पुस्तकें चलाने का आदेश दिया था।

पुस्तकें लागू करने के लिए जल्द ही निर्णय होगा

^निजीस्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पालकों के हित देखते हुए जल्द ही पुस्तकों पर निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए कलेक्टर सर चर्चा के बाद निजी स्कूल संचालकों की एक बैठक बुलाई जानी है। जिसमें उन्हें एनसीईआरटी या एमपी बोर्ड के पाठ्यक्रम लागू करने के लिए कहा जाएगा।^ -अरविंदचौरगड़े , जिलाशिक्षा अधिकारी होशंगाबाद

निजी स्कूलों ने नए सत्र के सिलेबस के लिए चुप्पी साधी