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यह है जायका

7 वर्ष पहले
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सोयाबीन खेती के लिए किसानों को प्रेरित करेगा जायका प्राजेक्ट

होशंगाबादकी कृषि क्षेत्र में पहचान अब धान के कटोरे के रूप में होने लगी है। किसानों का सोयाबीन से मोह भंग हो रहा है। यही कारण है कि क्षेत्र में सोयाबीन का रकबा लगातार घटते जा रहा है। ऐसे में सोयाबीन को क्षेत्र में पुन: स्थापित करने में जायका जीवन दान देने का काम करेगा। जापान की मदद से चल रहे इस पायलेट प्रोजेक्ट में मंगलवार को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय जबलपुर के प्रमुख वैज्ञानिक और कृषि विज्ञान केंद्र पवारखेड़ा के अधिकारी ग्राम घाटली निरीक्षण करने पहुंचे। आधुनिक तरीके से सोयाबीन की उपज को बढ़ाने के लिए चल रहे इस प्रोजेक्ट का मुआयना पूर्व में जापान से आए जायका अधिकारियों ने भी किया था।

जापान की मदद से चल रहा है प्रोजेक्ट

^जापानकी मदद से प्रदेश के पांच जिलों में यह प्रोजेक्ट चल रहा है। जापान के अधिकारी भी समय-समय पर निरीक्षण करते हैं। इसके अलावा स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्व विद्यालय इसकी माॅनिटरिंग करता है। इसी सिलसिले में हम मंगलवार को ग्राम घाटली आए हैं। डॉ.सुनील नाहतकर, प्रमुखवैज्ञानिक, कृषि विश्व विद्यालय जबलुपर।

>जापान द्वारा मध्यप्रदेश में सोयाबीन के उत्पादन काे बढाने का यह प्रोजेक्ट पांच जिलों में चलाया जा रहा है और इसे आर्थिक मदद दी जा रही है। सोयाबीन का यह प्रोजेक्ट होशंगाबाद जिले के घाटली के अलावा जबलपुर के सीहोरा, छिंदवाड़ा के मोहखेड़ा, टीकमगढ़ के कांटी और रीवा के रिती गांव में चलाया जा रहा है। इसमें चयनित किसानाें को हर स्तर पर मदद दी जा रही है। साथ ही ग्राम के अन्य किसानों को सोयाबीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक खेती के तरीकों से परिचित कराया जा रहा है।

पांच जिलों में चल रहा है प्रोजेक्ट

जायका का मतलब जापान इंटरनेशनल कार्पोरेशन एजेंसी है जो कि इस पायलेट प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी है। इसके तहत ग्राम घाटली में पांच किसानों को चयनित कर उनके एक-एक एकड़ खेत में सोयाबीन की उन्नत फसल के लिए प्रोग्राम किया गया। जिसमें किसान की केवल मेहनत लगी। प्रोजेक्ट के तहत खाद बीज से लेकर दवा और खेती की आधुनिक साधन जापान की मदद से उपलब्ध कराए गए।