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फुल रैक में मिला 1600 टन यूरिया

7 वर्ष पहले
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यूरियाकी एक पूरी रैक सोमवार को लगी। इसमें से आधा यूरिया प्राईवेट डीलर को दे दिया गया। वहीं शेष बचे आधे में से 300 टन यूरिया सीहोर को दिया गया है। इसके अलावा रविवार को बनापुरा में भी एक फुल रैक यूरिया की लगी थी। वही आज मंगलवार को भी एक रैक इटारसी में लगेगी। इसमें से भी आधा यूरिया प्राईवेट डीलर को दिया जाएगा।

इस रैक के बाद एक और रैक पाइप में होनी की बात कही जा रही है। संभावना है कि यह रैक भी बुधवार या गुरुवार को इटारसी में लग सकती है। जिला विपणन अधिकारी स्वाति राय ने बताया कि इसके बाद भी रैक आने की संभावना तो है पर यह नहीं बताया जा सकता है कि कब तक यह रैक लगेगी। सोमवार को जो रैक लगी उसमें से सहकारी सेक्टर को दिए गए 1300 टन में से होशंगाबाद को 400 टन, इटारसी को 400 टन, बाबई को 300 टन और पिपरिया को 200 टन यूरिया दिया गया है। वही बनापुरा को दिया गया पूरा 3000 टन यूरिया पूरा सहकारी सेक्टर को दिया गया है। बनापुरा में लगी फुल रैक सिवनी मालवा को दिए जाने का कारण यह बताया गया कि इस क्षेत्र में बोवनी पहले हो चुकी थी और किसान पहला पानी देने का इंतजार कर रहा है। इस क्षेत्र में तवा परियोजना द्वारा भी पहले पानी के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में पहला पानी देने के पहले किसान को फसल को यूरिया देना होगा।

कलेक्टरने ली जानकारी

पवारखेड़ाके एक कार्यक्रम में सोमवार को पहुंचे कलेक्टर संकेत भोंडवे ने वहां मौजूद किसानों से खाद की किल्लत की जानकारी ली। उन्होंने इस कार्यक्रम में अलग किसानों से चर्चा की और इसके बाद वहां मौजूद कृषि वैज्ञानिकों से रासायनिक खाद के विकल्प पर चर्चा की। उन्होंने किसानों को कहा कि खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने किसानों को बताया कि खाद की नियमित रैक लग रही है और प्राथमिकता के आधार पर खाद का आवंटन किया जा सकता है। इस मौके पर उन्होंने ने किसानों से रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने की अपील भी। कृषि वैज्ञानिकों को कहा कि वे खेती में उन विकल्पों से किसानों को परिचित कराए जिसमें यूरिया, डीएपी पर से किसानों की निर्भरता कम हो।

सोमवार को स्टेशन पर रैक लगने के बाद यूरिया लोड किया गया।