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‘लहू के कतरे-कतरे से हिन्दुस्तान लिख देना’
कलमके सारथी मेरा भी अरमान लिख देना, शहादत के सफर का साज और सामान लिख देना, वतन पर सिर कटाने का अवसर मिले मुझको लहू के कतरे-कतरे से हिन्दुस्तान लिख देना। िफरोजाबाद से आए कवि यशपाल यश ने जब यह कविता पढ़ी तो मैदान में उपस्थित हजारों श्रोताओं ने तालियां बजाकर उनके गीत की सराहना की।
संत शिरोमणि रामजीबाबा मेले में रविवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था, इसमें एक दर्जन कवियों ने कविताएं सुनाई। यशपाल यश ने फिरोजाबाद में बनने वाली चूड़ियों के महत्व को लेकर कविताएं सुनाई। इनके अलावा कवि कुलदीप रंगीला, मुकेश शांडिल्य, संगीता सरल, प्रियंका शुक्ला, ओमप्रकाश पाल, जगदीश सोलंकी, ज्ञानी बैरागी ने कविताएं सुनाई। कार्यक्रम रात 11.30 बजे शुरू हुआ जो रात 1.30 बजे तक जारी था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य मंत्री लालसिंह आर्य के अलावा पूर्व मंत्री मधुकर राव हर्णे, शिव चौबे, नपाध्यक्ष अखिलेश खण्डेलवाल, पूर्व नपाध्यक्ष माया नारोलिया, तहसीलदार अतुल सिंह, सीएमओ पवन सिंह सहित अनेक लोग मौजूद थे।
आज होगा गरबा नृत्य
मेलेमें चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 9 फरवरी को रात 8 बजे से गरबा नृत्य होगा। इसमें गरबा समूह के लोग गरबा की प्रस्तुति कर मां भगवती की आराधना करेंगे।
बार-बार खराब हुआ माइक
सम्मेलनके लिए लगे माइक में बार-बार परेशानी आने से श्रोताओं का मजा किरकिरा हुआ। स्थिति यह थी कि सभी कवि अपनी कविता बीच में रोककर माइक को ठीक करने की बात कह रहे थे। पार्षदों को उठकर माइक ठीक करवाना पड़ रहा था। रात 1 बजे कवि बैरागी ने यहां तक कह दिया के दो की जगह एक ही माइक चलने दें।
होशंगाबाद| मेलेमें कविताएं सुनते हुए सैकड़ों श्रोता।
कवि सम्मेलन