माफिया को फायदा...
माफिया को फायदा...
माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए रेत की कीमतों से हटेगा सरकारी नियंत्रण : ऐसीस्थिति में ठेकेदार खदान से प्रति घनमीटर रेत उठाने की दर खुद तय करेगा। फिर रेत माफिया बाजार में उसकी बिक्री की दर तय करेंगे। अभी खदान पर रेत उठाने की दर साल भर के लिए खनिज निगम तय करता था।
अबक्या होगा? : खदानसे रेत उठाने की सरकारी दर 374 रुपए प्रति घनमीटर रेत (होशंगाबाद स्थित खदान से उठाने पर) बाजार में पहुंचते-पहुंचते 1400 रुपए प्रति घनमीटर हो जाती है। बारिश के दिनों में यह 1800 से 2000 रुपए प्रति घनमीटर हो जाती है। सरकार का नियंत्रण हटने पर यह दर रेत माफिया की मर्जी के अनुसार होंगी।
खनिजनिगम के पास 60 फीसदी खदानें : प्रदेशमें जितनी भी बड़ी रेत खदान हैं, वह खनिज निगम के पास हैं। उनकी नीलामी भी वही करता है। मसलन होशंगाबाद, इंदौर में धामनोद, हरदा, ग्वालियर और जबलपुर मिलाकर करीब 18 जिलों में ये खदानें हैं। निर्माण कार्यों में 60 फीसदी सप्लाई इन्हीं से होती है।
260करोड़ का सालाना कारोबार : वित्तीयवर्ष 2013-14 में अकेले मप्र खनिज निगम ने 200 करोड़ रुपए की रेत का कारोबार किया था। इस बार यह लक्ष्य 260 करोड़ के आस-पास है। जितनी भी रेत खदानों की मियाद पूरी हो रही है, वहां नए सिरे से क्वांटिटी के आधार पर रेत की नीलामी होगी।
बार-बारबढ़ीं कीमतें, कंट्रोल भी रहा 2013 में : खनिजनिगम ने 150 रुपए प्रति घनमीटर रेत की मात्रा पर खदानों की नीलामी की। इसमें 53 रुपए रायल्टी (खनिज निगम अपने पास रखता है), 53 रुपए समतुल्य रायल्टी (सरकार को दी जाने वाली), 20 रुपए वैट तथा 24 रुपए खनिज निगम का खर्च रखा गया। खदान से रेत उठाने की कीमत खनिज निगम ने 280 रुपए प्रति घनमीटर रखी।
-सितंबर 2014 में - 94रु. प्रति घनमीटर रेत की कीमत बढ़ा दी गई। इस हिसाब से नीलामी दर 244 रुपए प्रति घनमीटर हो गई। इसमें 100 रुपए रायल्टी (खनिज निगम अपने पास रखता है), 100 रुपए समतुल्य रायल्टी (सरकार को दी जाने वाली), 20 रुपए वैट और 24 रुपए खनिज निगम के खर्चे। खदान से रेत उठाने की कीमत खनिज निगम ने 374 रुपए प्रति घनमीटर रखी। इसके बाद ट्रांसपोर्टर शहर तक जाने का खर्च जोड़कर रेत की बिक्री करते थे।