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नर्मदा में मिल रहे नालों को रोकने 6.50 करोड़ रु. का प्रस्ताव आया
नर्मदामें मिल रहे नालों को रोकने के लिए एक बार फिर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने टैंडर जारी किए हैं। इस बार करीब 5 लाख रुपए कम के रेट आए हैं। रेट 6 करोड़ 50 लाख रुपए के आए हैं। पिछले बार यह रेट 6 करोड़ 55 लाख रुपए के थे। करीब दो करोड़ की राशि अधिक आने के कारण शासन ने इसे निरस्त कर दिया था। पीएचई की यह योजना 4 करोड़ 50 लाख रुपए की है। अब यदि इस बार प्रस्ताव स्वीकृत होते हैं तो फिर योजना पर अगले माह से काम शुरू हो सकता है।
होशंगाबाद में नर्मदा में प्रदूषण नालों के कारण सबसे ज्यादा हो रही है। छोटे-बड़े करीब 10 से ज्यादा नाले का पानी नर्मदा में मिल रहा है। इसमें कोरीघाट के नाले से भी पानी नर्मदा में जाता है। ओवरफ्लो होकर आए दिन नर्मदा में गंदा पानी मिल रहा है। इससे सेठानीघाट पर प्रदूषण बढ़ रहा है। सेठानीघाट के अलावा विवेकानंद, परमहंस, मंगलवारा, कलेक्टोरेट घाट, कमिश्नरघाट, वीर सावरकर घाट सहित अन्य जगहों पर छोटे नाले का पानी नर्मदा में सीधे मिल रहा है। नाले के पानी को रोकने के लिए ही राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत यह काम होना है।
स्वीकृति बाकी है
^नएटेंडर को मुख्य अभियंता आफिस से स्वीकृति मिल गई है। यह अब प्रमुख अभियंता कार्यालय में है। यहां से स्वीकृति मिलती है तो फिर इसे योजना पर आगे काम किया जाएगा।^ सुबोधजैन, पीएचई,कार्यपालन यंत्री
2 करोड़ ज्यादा का आया प्रस्ताव
योजना4 करोड़ 50 लाख रुपए की है और प्रस्ताव 6 करोड़ 50 लाख रुपए के आए हैं। इसका कारण यह है कि यह योजना 2009 की है और अब 2014 चल रहा है। 5 साल में बढ़ी मंहगाई को ध्यान में रखते हुए संबंधित कंपनी ने प्रस्ताव बढ़ाया है।
दूसरे चरण के लिए सर्वे शुरू
ड्रेनेजसिस्टम को दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में मालाखेड़ी से लेकर भीलपुरा तक का एरिया रहेगा तो दूसरे चरण में ग्वालटोली, रसूलिया, एसपीएम सहित अन्य क्षेत्र शामिल होंगे। इसके लिए एप्को ने सर्वे शुरू कर दिया है। सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद इसके लिए टेंडर जारी होंगे। यह काम भी पीएचई ही करेगी। दूसरे चरण के लिए प्रशासन पीएचई को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए जमीन देगा।
स्वीकृत हो सकता है टेंडर
पानी रोकने की योजना
पहली बार में भले ही दो कराेड़ रुपए के प्रस्ताव ज्यादा आने के कारण टेंडर निरस्त हो गया हो, पर इस बार इसके स्वीकृत होने की