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300 अपराधों के आरोपियों की गिरफ्तारी के पहले अदालत की अनुमति जरूरी

7 वर्ष पहले
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चक्काजाम, धरना प्रदर्शन, अवैध हथियार, चोरी, जेबकटी, सूदखोरी, जुआ एक्ट, अवैध शराब, ठगी, झूठी गवाही, दहेज प्रताड़ना सहित करीब 300 धाराओं के आरोपी को गिरफ्तार करने के पहले पुलिस को न्यायालय की अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति के आरोपी पर कार्रवाई करना संबंधित पुलिस अधिकारी को भारी पड़ सकता है। जिन अपराधों में सात साल तक की सजा का प्रावधान है, उन धाराओं में दर्ज केस के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश जारी किए गए हैं। जिले में आदेश लागू कर दिया गया है। आरोपियों को गिरफ्तार करने की बजाए उन्हें नोटिस जारी कर कोर्ट में चालान पेश करना होगा। आदेश का पालन करवाने के लिए हाईकोर्ट ने जिला जज और पुलिस विभाग ने आईजी, एसपी को पत्र भेजे हैं। एसपी आईपी अरजरिया ने भी जिले के सभी पुलिस अधिकारियों को पत्र जारी कर दिए है। एसपी ने बताया न्यायालय से जारी आदेश हमें प्राप्त हुए हैं। सात साल तक की सजा के केस में अपराधी की गिरफ्तारी न्यायालय की अनुमति पर ही होगी। आदेश के संबंध में सभी पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी है।

अब यह करेगी पुलिस

अगरअपराधी आदतन है उसके फरार होने या उसके कारण कानून व्यवस्था बिगड़ने की संभावना है तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन कोर्ट को कारण बताना होगा। ऐसे अपराध जिनमें सात साल तक की सजा का प्रावधान है और किसी पर ऐसी ही धाराओं में केस दर्ज होता है तो पुलिस आरोपी को सिर्फ नोटिस भेजेगी। आरोपी को खुद कोर्ट में पेश होना पड़ेगा।

300धाराओं में राहत

लोकअभियोजक केके थापक ने बताया कि पुलिस अपराध अनुसार आईपीसी में दर्ज 511 धाराओं के तहत एफआईआर करती है। अब करीब 300 धाराओं में दर्ज केसों में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होगी। इनमें मुख्य केस दहेज प्रताड़ना, मारपीट, मामूली चोट, दुर्घटना, शासकीय कार्य में बाधा, मामूली छेड़छाड़, तोड़फोड़, चक्काजाम, सहित अन्य धाराओं में राहत दी है।