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निलंबित सिविल सर्जन के साथ मिलकर बना रहे थे दवा की सूची
^उनकेसभी आर्डर निरस्त कर दिए है। वे अपनी आदतों से बाज नहीं आएंगे तो उनका साथ देने वाले भ्रष्ट कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी।^ पंकजअग्रवाल, आयुक्तस्वास्थ्य विभाग मध्यप्रदेश
शिकायत मिली है
^मुझेशिकायत मिली है कि निलंबित सीएस कार्यालय में बैठकर काम कर रहे हैं। मैं इसकी जांच करवाता हूं।^ संकेतभोंडवे, कलेक्टरहोशंगाबाद
भास्कर के खुलासे के बाद हुई थी कार्रवाई
जिलाअस्पताल में नियमों को दरकिनार कर दवाओं के आर्डर के मामले को सबसे पहले भास्कर ने उठाया था। 21 नवंबर को छापी खबर में महज 53 लाख की हेरीफेरी बतौर दस्तावेज सामने लाए थे। जांच में मामला 2.42 करोड़ का निकला था। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ ने इस संबंध में पहले से जानकारी होते हुए भी कोई कार्रवाई नहीं की थी। इसकी सूचना प्रमुख सचिव और स्वास्थ्य आयुक्त को जैसे ही लगी, तो उन्होंने टीम भेजकर जब जांच कराई ताे मामला 2.42 करोड़ का निकला। भोपाल से आई टीम ने 2.42 करोड़ के सभी आर्डर, बिलों और नियम विरुद्ध खरीदी गई दवाओं के सभी आर्डर को निरस्त करने और दवाओं की वापसी करने के निर्देश तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. रविंद्र गंगराडे को दिए गए थे।
नए सीएस के साथ बैठकर फोन पर बात करते निलंबित सीएस।
नगर संवाददाता|होशंगाबाद
जिलाअस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन डा. डीजी सिंह निलंबन के बाद भी काम में हस्तक्षेप लगातार कर रहे हैं। अस्पताल के दवा स्टोर में बुधवार को दिनभर कर्मचारियों के काम में डॉ.सिंह हस्तक्षेप करते रहे। वर्तमान सीएस डॉ.दिनेश देहलवार का कहना है कि वे डॉ.सिंह के साथ तीन सौ दवाओं की लिस्ट को अपडेट करा रहे थे, जिसे अस्पताल में 1 जनवरी से उपलब्ध कराई जाना है। इतना ही नहीं उन्होंने स्टोर के कर्मचारियों को पुरानी दवाओं के वाउचर को काटने के लिए भी दबाव डाला है। जब कर्मचारियों की सूचना के बाद मीडिया स्टोर पहुंचा, तो मीडियाकर्मियों को देखकर डॉ.डीपी सिंह वहां से चले गए। वर्तमान सीएस डॉ.दिनेश देहलवार का कहना है कि स्टोर में कोई बाउचर नहीं काटा जा रहा था। बस दवाओं की लिस्ट तैयार कराने के लिए डॉ.सिंह आए हुए थे। इस समय स्टोर में डॉ.डीपी सिंह के साथ एकाउंटेंट रामसिंह पटेल, निलंबित हो चुके राजेश बरखड़े सहित अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे।
फिरसे रिलिविंग लेटर लेकर घूम रहे
जिलाअस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन डॉ.डीपी सिंह खरीदी