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बीमारी के लक्षणों ने उठाए सवाल

7 वर्ष पहले
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सूजन वाला

लिम्फ नोड

संक्रमण में यह हो रहा है

यहसंक्रमण बच्चों को खांसी-सर्दी और मामूली बुखार के साथ शुरू हो रहा है। इसके बाद बच्चे अचानक गले में सूजन आने की शिकायत करते हैं। जिसके कारण बच्चों को खाने-पीने और यहां तक की सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इधर, दूसरी ओर गलघोंटू (डिप्थीरिया) के मरीजों में ठीक इसी तरह के लक्षण पाए जाते हैं।

जांच से मिलेगी जानकारी

^फिलहालमोहासा में फैले संक्रमण के विषय में कुछ कहा नहीं जा सकता। हमने गांव के पीड़ित बच्चों के थूक-खखार के सैंपल लिए हैं। इनकी रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि गांव में बच्चों की मौत किस तरह की बीमारी के कारण हुई है। इसके बाद जो भी जरूरी होगा, कदम उठाएंगे।^ -डॉ.एएलमरावी सीएमएचओ होशंगाबाद

अभी यह भी बीमार हैं

16साल की अनिता पिता कालूराम, 20 साल की शीला पिता सीताराम, 10 साल की दुर्गा पिता शमल और रोशनी पिता झमल एवं दो अन्य बच्चे अभी बीमार चल रहे हैं। रविवार को गांव पहुंची टीम ने इनके सैंपल लिए हैं।

>16 सितंबर 2014 को 8 साल की आरती पिता प्रेम की मौत

>22 सितंबर 2014 को 9 साल की खुशी पिता धरमचंद्र मालवीय की मौत

>25 सितंबर 2014 को 8 साल की मोनिका पिता मनमोहन यादव की मौत

इन बच्चियों ने दम तोड़ा

नगर संवाददाता|होशंगाबाद

माखननगरके मोहासा गांव में डिप्थीरिया से मिलते-जुलते लक्षणों वाली बीमारी के मरीज मिलने के मामले ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। अगर मोहासा गांव के पीड़ितों के रविवार को लिए गए सैंपल की जांच में डिप्थीरिया की पुष्टि हो जाती है, तो स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम पर भी सवाल खड़े होंगे। स्वास्थ्य विभाग ने सीएम ऑनलाइन में शिकायत के बाद आनन-फानन में जांच टीम को रविवार को मोहासा गांव भेजा था। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बच्चों का टीकाकरण ठीक तरह से हुआ है, तो डिप्थीरिया होने का कोई सवाल ही नहीं है। ऐसे में बच्चों को लगाए जाने वाले डीटीपी के टीकों का भी रिकार्ड देखा जाना चाहिए। इधर, ग्रामीण तीन मौतों के बाद 6 अन्य बच्चों के भी उसी तरह के लक्षण वाली बीमारी से पीड़ित होने के कारण सहमे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार डीपीटी (गलघोंटू, कालीखांसी और टिटनेस ) वैक्सीन के बच्चों को पांच टीके दिए जाते हैं। इसम