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बेटा तो चला ही गया, उसकी आंखें भी सुरक्षित नहीं रख पाए माता-पिता

7 वर्ष पहले
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होशंगाबाद में भी नहीं सुिवधा

होशंगाबाद|सिंधीकॉलोनी की निवासी मीराबाई की 5 दिसंबर 2012 को शहर के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई थी। मीराबाई ने मौत से पहले अपनी आंखें दान किए जाने की इच्छा व्यक्त की थी। उनकी मौत के बाद उनके पति शीतलदास खत्री ने तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. सुधीर जैसानी से लेकर बैरागढ़ के सेवा सदन अस्पताल तक से संपर्क किया, लेकिन प|ी की अंतिम इच्छा पूरी नहीं कर पाए, क्योंकि होशंगाबाद में इसके लिए सुविधाएं नही है।

अधूरी रह गई तमन्ना

अभिषेकके पिता लखनलाल साहू अपने बेटे की आंखें दान करना चाहते थे। लेकिन इटारसी में नेत्रदान के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। नेत्रदान के प्रावधानों के मुताबिक मृत्यु के 6 घंटों के अंदर आंखों को सुरक्षित रखना होता है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एनके जैन ने बताया कि मृतक के माता-पिता ने नेत्रदान की इच्छा जताई थी, लेकिन इटारसी अस्पताल में इसके लिए इंतजाम नहीं है। इसलिए नेत्रदान नहीं हो सका।

दीवान कॉलोनी निवासी पैसेंजर लोको पायलट लखनलाल साहू सोमवार सुबह बाजार से सामान लेने के लिए अपने 15 वर्षीय बेटे अभिषेक के साथ पुरानी इटारसी के मार्केट गए थे। वहां से लौटते समय लखनलाल एक्टिवा चला रहे थे और बेटा अभिषेक सामान पकड़कर पीछे बैठा था। जैसे ही लखनलाल ने अपनी गाड़ी को मंगलभवन के सामने से मोड़ा, पीछे से रहे ट्रक ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। दुर्घटना में बुरी तरह घायल अभिषेक और लखनलाल को सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने अभिषेक को मृत घोषित कर दिया, वहीं लखनलाल को दो फ्रैक्चर आए।

पिता के सामने टूट गई बेटे की सांसें

नगर संवाददाता|इटारसी

सड़कदुर्घटना में अपने इकलौते बेटे को गवां चुके माता-पिता ने जब बेटे की आंखें दान करने की इच्छा व्यक्त की, तो उनके इस त्याग को देख वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं। लेकिन तकनीकी समस्याओं के चलते माता-पिता की यह ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी। दीवान कालोनी निवासी 10 वीं के छात्र अभिषेक साहू की सोमवार को एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। परिचितों से मिली जानकारी के अनुसार अभिषेक 4 बहनों का इकलौता भाई था। उसका सबसे बड़ी बहन से विशेष जुड़ाव था, जो दिल्ली में डॉक्टर हैं। फ्लाइट मिलने से सोमवार को वे इटारसी नहीं सकीं। इसलिए अभिषेक का अंतिम संस्कार मंगलवार को सुबह 8 बजे होगा।