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सीएम हेल्पलाइन पर गलत जानकारी दे रहे अफसर
होशंगाबाद| आमलोगों की शिकायतों के जरिए स्वस्थ शासन की स्थापना के इरादे से शुरू की गई मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की ड्रीम स्कीम सीएम हेल्पलाइन खुद शिकायतों की शिकार हो रही है। 181 नंबर पर शिकायतों और समस्याओं के तत्काल समाधान का दावा किया था, अब अफसर उसमें गलत जानकारी दे रहे हैं। पढ़ें|पेज10
नतीजाहेल्पलाइन गंदगी और अतिक्रमण जैसी मामूली शिकायतों तक सिमटकर रही गई है। हैरानी यह कि कई बार इन मामूली शिकायतों का भी निराकरण नहीं होता है।
1 अगस्त 2014 को हेल्पलाइन की शुरुआत करते हुए यह दावा किया था कि 80 फीसदी मामलों की मॉनीटरिंग मुख्यमंत्री और सीएस खुद करेंगे। माॅनीटरिंग निचले स्तर पर समाधान का फीडबैक मिलने के आधार पर होगी। बड़ी परेशानी यह है कि नीचे से ऊपर तक करीब तीन लेवल पर अधिकारी गंभीर शिकायतों और भ्रष्टाचार के मामलों को दबाने में जुट जाते हैं। कारण साफ है कि शिकायतें उनसे या उनके ही अधीनस्थों से जुड़ी होती हैं। इतना ही नहीं एक शिकायत कई बार करना पड़ती है। इसके बाद भी जो जवाब मिलता है वह संतोषप्रद नहीं होता। उदाहरण के लिए उज्जैन में ही भाजपा के एक वरीष्ठ नेता का मामला लिया जा सकता है। भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष रामसिंह सांखला ने शहर की प्रसिद्ध योगेश्वर टेकरी पर कुछ लोगों द्वारा दो बीघा जमीन पर स्थायी निर्माण की शिकायत की। यह भी बताया कि किस तरह नगर निगम के निचले कर्मचारियों-अधिकारियों की मिलीभगत से यह हुआ है। कई बार शिकायत के बावजूद उन्हें झूठा समाधान ही मिला। नगर निगम के भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे दर्जनों उदाहरण प्रदेश में हैं। आम लोगों सहित भाजपा संगठन के ही पदाधिकारियों का मानना है कि हेल्पलाइन स्कीम की नए सिरे से समीक्षा की जरूरत है।
181:कॉल कीजिए मगर कार्रवाई की गारंटी नहीं (पढ़ें पेज 00)