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एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम पर लगाई डुबकी

7 वर्ष पहले
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मोरपंख की ढाल बनाकर किया पूजन

नर्मदाऔर तवा नदी के संगम तट बांद्राभान में पूर्णिमा पर स्नान के लिए आए श्रद्धालुओं ने अपने देवी-देवताओं को भी स्नान कराया। जिले के कई क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने मोर के पंख की ढाल बनाई। ढाल के नीचे देवी-देवताओं को रखा। इसके बाद उन्हें नर्मदा में स्नान कराया। स्नान के बाद फिर ढाल के नीचे रखकर उनकी पूजा की। मान्यता यह है कि इस दिन देवताओं को स्नान कराने से सालभर उनकी कृपा बन रहती है।

{ सुबह चार बजे से शुरू हो गया था स्नान

{एक दिन पहले ही पहुंच गए थे श्रद्धालु

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर नर्मदा तवा संगम स्थल बांद्राभान पर लगे मेले में अपनी जरूरत की वस्तु खरीदी करते श्रद्धालु।

नगर संवाददाता|होशंगाबाद

नर्मदाऔर तवा नदी के संगम स्थल बांद्राभान में कार्तिक पूर्णिमा पर एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। पूर्णिमा पर तड़के 4 बजे से स्नान शुरू हो गया था, जो शाम तक चलता रहा। संगम पर स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। शाम से श्रद्धालुओं का जाना शुरू हो गया था।

संगम पर डुबकी के लिए एक दिन पहले ही श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंच गई थी। तट पर पहुंचे श्रद्धालु सुबह होने का इंतजार कर रहे थे। सुबह होते ही उन्होंने पावन डुबकी लगाना शुरू कर दिया था। दोपहर में सबसे ज्यादा भीड़ रही। मेले में स्नान के बाद महाआरती की गई। वहीं पूर्णिमा स्नान के लिए सेठानी घाट पर भी शाम तक 10 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। मंगलवारा, विवेकानंद और पोस्ट ऑफिस घाट पर भी नर्मदा स्नान के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं ने स्नान किए। इस दौरान घाटों और संगम तट पर विशेष व्यवस्थाएं की गई। सेक्टर अधिकारी भी तैनात किए गए थे।













मेले में ये भी हुआ

- बुधवार रात्रि से लेकर गुरूवार शाम तक मेले में 33 लोगों के परिवार से बिछडऩे की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम में पहुंची। जिसमें 15 बालिका, 9 बालक, 2 पुरुष 7 महिलाएं शामिल थी। पुलिस की एक टीम ने सभी को सर्च कर परिवार को सकुशल सुपुर्द कर दिया।

- जो लोग मेले में दो दिन पहले पहुंचे थे, उन्हें दोपहर बाद पार्किंग से वाहन निकालने में असुविधा हुई। क्योंकि वाहन मेला स्थल से एक-दो किमी दूर पार्किंग जोन में अंदर फंसे हुए थे।

- मेले में घोड़ाडोंगरी के सातलदेही से सवारी लेकर आई एक यात्री बस के लोगों