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बैंक में चोरी के तीन आरोपी पकड़ाए, 65 में से सिर्फ 2 लाख 32 हजार जब्त

6 वर्ष पहले
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{ आरोपियों से 2 लाख 32 हजार रुपए नकद

{वारदात में उपयोग की गई बोलेरो जीप और हथियार बरामद

क्राइमरिपोर्टर होशंगाबाद/पिपरिया।

बनखेड़ीएसबीआई शाखा में चोरी की घटना को अंजाम देने के लिए चोरों के गिरोह ने 20 जनवरी की रात 10.15 बजे से बैंक में पीछे तरफ से घुसने का प्रयास शुरू कर दिया था। इस घटना को अंजाम देने के लिए पिछले तीन माह से गिरोह की तैयारियां चल रही थीं। चोरी से एक दिन पहले 19-20 जनवरी की रात को चोरों ने एक बार फिर रैकी की थी। 21 जनवरी की रात को चोर बैंक से 56 लाख नकद और 9 लाख का सोना ले गए थे। वारदात के दौरान बैंक के अंदर गिरोह के 5 सदस्य थे और बाहर दो जीपों के ड्राइवर उनके इशारे का इंतजार कर रहे थे। एसपी एपी सिंह ने चोरी की इस वारदात का खुलासा सोमवार को पिपरिया थाने में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में किया।

ऐसेकी थी चोरी

घटनाकी रात दो बोलेरो गाड़ियां बैंक के पास गिरोह के पांच लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर, औजार और अन्य हथियारों के साथ छोड़ कर चली गईं। चोर धीरे से मौका देखकर बैंक के कैंपस में पहुंचे और पीछे के ओर चले गए। पुलिस के मुताबिक चोरों ने रात को 10.15 बजे से बैंक के अंदर घुसने के प्रयास शुरू किए। खिड़की ग्रिल गैस कटर से काटकर वे अंदर पहुंचे और तड़के 3 बजे तक गैस कटर से स्ट्रांग रूम का दरवाजा काटने के लिए मशक्कत करते रहे। दरवाजा काटकर स्ट्रांग रूम से नकदी और सोना निकाल लिया। फिर ड्राइवरों को मोबाइल पर सूचना देकर बुलाया।

19 दिन में किया बैंक चोरी का खुलासा

एसपीश्री सिंह ने बताया कि जिले की सबसे बढ़ी बैंक चोरी का खुलासा मात्र 19 दिन में किया। पूरी कार्रवाई एडीशनल एसपी शशांक गर्ग के नेतृत्व में हुई। इसमें एसडीओपी पिपरिया कमलेश कुमार, रामस्नेही चौहान, निरीक्षक संतोष चौहान, देवेंद्र कुमार, उप निरीक्षक अनूप ऊईके, उप निरीक्षक गिरीश खरे, आशीष चौधरी, प्रधान आरक्षक राजेश, दिनेश, आरक्षक आशीष गीते, विशाल, शैलेंद्र, उमेश डहारे का योगदान रहा।

बैंक काे पकौड़ा पुलिस को नोक्ता कहते थे

आरोपीआपसी बातचीत में सांकेतिक शब्दों का इस्तेमाल करते थे। वे बैंक को पकौड़ा कहते थे, सराफा दुकानों को धूलिया-पीलिया, तिजोरी को भूतनी और पुलिस को नाेक्ता कहकर बुलाते थे। पुलिस पूछताछ में यह सभी तथ्य सामने आए हैं।

जीप पर मप्र शासन और भाजपा का निशान

वारदातमें उपयोग की गई एक बोलेरो जीप पर मप्र शासन लिखा है, जबकि दूसरी पर भाजपा का निशान बना है। हालांकि पुलिस का कहना है कि वीरेंद्र दुबे का पार्टी से कुछ ज्यादा लेना देना नहीं है। क्योंकि दोनों गाड़ियों में संस्थानों के नामों का गलत उपयोग किया गया है।

पूना अगला टारगेट था

^पूछताछमें यह भी खुलासा हुआ है कि चोर गिरोह का अगला टारगेट पूना (महाराष्ट्र) हो सकता है। आरोपियों ने मप्र में डिंडोरी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर जिलों में भी इस प्रकार की चोरी की वारदात की है। आगे की पूछताछ के लिए चार दिनों की सभी की रिमांड ली गई है। एपीसिंह, एसपी होशंगाबाद

तीन देशी कट्टे और 22 जिंदा कारतूस बरामद

एसपीएपी सिंह ने बताया कि पकड़े गए तीनों आरोपियों से 3 देशी कट्टे, 22 जिंदा कारतूस, 4 मोबाइल फोन, आक्सीजन गैस सिलेंडर बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक चोरी को अंजाम देकर फरार सातों लोग बदायूं (यूपी) लौट गए। वहां वे अपने ठिकाने पर दो दिन तक रुके और खूब सेलिब्रेशन किया। जिला पुलिस और यूपी पुलिस की इनवेस्टीगेशन में यह तथ्य सामने आए हैं।

छोटी बनखेड़ी के सरपंच ने साधन उपलब्ध कराए थे

बनखेड़ीएसबीआई बैंक में चोरी की घटना में मदद करने वाले गाडरवारा की छोटी बनखेड़ी के सरपंच वीरेंद्र दुबे ने चोरों को सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई थीं। पूर्व सरपंच वीरेंद्र दुबे ने चोरों से तीन लाख रुपए की रकम भी ली थी। चोरी के बाद सभी लोग इधर-उधर बिखर गए। पुलिस इस गिरोह में शामिल 10 लोगों में से महज 3 को ही पकड़ सकी है। वहीं, अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बताया कि चोरी के 2 लाख 32 हजार 500 रुपए उन्होंने वीरेंद्र दुबे के पास से वसूल किए हैं। छोटी बनखेड़ी के सरपंच पर लाखों का कर्ज भी है। उसे सालीचौका शक्कर मिल से वित्तीय अनियमितताओं के चलते बाहर भी निकाला जा चुका है। पकड़े गए दो अन्य आरोपियों में बाबूलाल उर्फ बबलू श्रीवास (गाड़ी का ड्राइवर)और लायक अली को गाडरवारा से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि वारदात में शामिल 7 अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। इनमें ककराला जिला बदायूं (उप्र) निवासी अशरार, अशरफ, नबाबुल, शमशाद, बाबू खां, अकमल एवं गाडरवारा निवासी विनोद नाई शामिल हैं। इन पर हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य चोरी के मामले दर्ज हैं। इस चोरी को पकड़ने में होशंगाबाद पुलिस ने उत्तरप्रदेश पुलिस की भी मदद ली।

पुलिस ने जब्त किए रुपए।

घटना के दौरान इन दोनों जीप का उपयोग किया गया था।