पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • तंबुओं की बस्ती और प्लाइवुड की सड़कें बनना शुरू

तंबुओं की बस्ती और प्लाइवुड की सड़कें बनना शुरू

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नदी महोत्सव को लेकर संगम स्थल पर तंबू लगना शुरू हो गए है।
होशंगाबाद। नर्मदा और तवा नदी के संगम स्थल बांद्राभान में नदी महोत्सव के लिए तंबुओं की बस्ती बनना शुरू हो गया है। महोत्सव इस बार 13 फरवरी से शुरू हो रहा है, जो 15 फरवरी तक चलेगा। महोत्सव में इस बार विदेश से कम ही विशेषज्ञ आने की उम्मीद है। उनकी जगह जमीन से जुड़े तथा नदियों पर काम करने वाले देश के ही विशेषज्ञ रहेंगे। इनमें नदियों को पुनर्जीवित करने वाले जैसलमेर के चतरसिंह और महाराष्ट्र के पोपटराव पवार जैसे लोग अपने विचार रखेंगे।

होशंगाबाद से 8 किमी दूर बांद्राभान संगम स्थल पर इस समय शहर के समान चहल-पहल है। संगम के पास तंबुओं का शहर बनाया जा रहा है। इस बार करीब 100 सूट बनाए जा रहे हैं। इनमें से करीब एक दर्जन बन चुके हैं। हर सूट एक घर की तरह होगा, जिसमें कमरे, टाॅयलेट आदि की सुविधाएं दी जा रही हैं। महोत्सव में शामिल होने बाहर से आने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था की जा रही है।

संगम स्थल पर बिजली सप्लाई के लिए डीपी लग गई है, तो रेत पर प्लाइवुड की सड़कें बनाई जा रही हैं। 11 फरवरी तक सभी घर बन जाएंगे। इन घरों के नाम भी नदियों के नाम पर ही रहेंगे। इस बार का विषय नर्मदा को रसायनों से हो रहे नुकसान पर केंद्रित है। यानी खेतों और उद्योगों से निकल रहे रसायनों से नर्मदा कितनी प्रदूषित हो रही है और कैसे उसे बचाया जा सकता है। इसे लेकर विशेषज्ञ अपनी बात रखेंगे। महोत्सव में तीन दिनों तक मंथन के बाद निकले निष्कर्ष को जनता के सामने लाया जाएगा।

अनिल माधव दवे ने बताया कि महोत्सव का पूरा कार्यक्रम तय किया जा रहा है। अभी जिनके आने की सहमति मिल गई है, उनकी लिस्ट बनी है लेकिन अभी तक विदेशों से किसी का नाम फाइनल नहीं हुआ है। दो-तीन दिन में सब तय हो जाएगा।

नदी महोत्सव में ये होंगे अतिथि

- सीएमशिवराज सिंह चौहान

- केंद्रीय मंत्री उमाभारती

- आरएसएस से भैयाजी जोशी

- नदी विशेषज्ञ पोपटराव पवार

- नदी विशेषज्ञ राजीव जैन

- नदी विशेषज्ञ कृष्णगोपाल माला

{नदी विशेषज्ञ नीलम शाह, श्रीपाल शाह

- संत स्वामी चिन्‍मयानंद

- प्रसार भारती से सूर्य प्रकाश

- खेती विशेषज्ञ सुभाष पालेकर

- नदी विशेषज्ञ चतरसिंह

पंचायत चुनाव और परीक्षा का असर : नदी महोत्सव पर इस बार पंचायत चुनाव का भी असर रहेगा। आचार संहिता लगी होने के कारण सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं हो पाएंगे, वहीं बोर्ड परीक्षा एक मार्च से है, इसलिए स्कूली बच्चों की संख्या भी पिछली बार जितनी रहने की संभावना कम है।