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भारत को शूटिंग, तैराकी में पदक

7 वर्ष पहले
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शक्ति की आराधना

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जजों की नियुक्ति जज ही अच्छे से कर सकते हैं : जस्टिस लोढ़ा

भारत 16वें स्थान पर

देश स्वर्ण चांदी कांस्य

चीन91 49 49

जापान 31 37 36

द.कोरिया 30 42 35

भारत01 02 14

रिटायरहोने से एक दिन पहले चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा, ‘कॉलेजियम व्यवस्था को खत्म कर किसी और तरीके से जजों को चुना गया तो न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित होगी। जजों की नियुक्ति जज ही अच्छे से कर सकते हैं। जज होने के नाते हमें उनके कोर्ट क्राफ्ट, बर्ताव, स्किल, कानूनी ज्ञान और अन्य पहलुओं की ज्यादा समझ होती है।\\\' जस्टिस लोढ़ा का इशारा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की तरफ था।

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जिससेजजों की नियुक्ति में केंद्र सरकार का दखल बढ़ जाएगा। जबकि अब तक जजों का कॉलेजियम ही जजों की नियुक्ति करता था। जस्टिस लोढ़ा ने यह भी कहा कि \\\"न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका में आपसी तनातनी सशक्त लोकतंत्र की निशानी है। यही उसकी खूबसूरती भी है। लेकिन इसके लिए कोई सीमा रेखा तय नहीं है। इसी वजह से एक-दूसरे के क्षेत्र में चले जाते हैं। इससे ही दिक्कतें आती हैं। सभी अंगों को अपनी सीमा में रहना चाहिए। अच्छा होता यदि इनके बीच सीमा निर्धारित होतीं। भारत-चीन के बीच भी सीमा का निर्धारण नहीं है। इसी कारण तनाव हो रहे हैं।\\\'





जस्टिस सदाशिवम को गवर्नर पद स्वीकार नहीं करना चाहिए था

जस्टिस लोढ़ा ने पूर्व चीफ जस्टिस पी सदाशिवम को गवर्नर बनाने पर भी ऐतराज उठाया। उन्होंने कहा कि मेरी व्यक्तिगत राय है कि उन्हें यह पद स्वीकार नहीं करना चाहिए था। जज को रिटायर होने के दो साल तक सरकार का कोई पद नहीं लेना चाहिए। ट्रिब्यूनलों और अन्य आयोगों में नियुक्ति प्रक्रिया बदलनी चाहिए।\\\' उन्होंने यह भी कहा कि \\\"मैं खुद को वक्त देना चाहता हूं। इसलिए आप मुझे फिलहाल लोकपाल या किसी अन्य पद पर नहीं देख सकेंगे।\\\'





दुखहै छुटि्टयां घटाने में कामयाब नहीं हुआ

जस्टिसलोढ़ा ने चीफ जस्टिस बनने के बाद कहा था कि जब अस्पताल 365 दिन काम करते हैं तो कोर्ट क्यों नहीं? उन्होंने छुटि्टयां कम करने के लिए बार काउ