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ड्रेनेज सिस्टम के लिए दो करोड़ अिधक का आया टेंडर निरस्त
नर्मदामें मिलने वाले नाले अभी रुकेंगे नहीं। नर्मदा में मिलने वाले नालों को रोकने के लिए राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत होने वाले काम के टेंडर शासन ने दो करोड़ रुपए की राशि अधिक होने के कारण निरस्त कर दिया है। अब नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया होगी। इसका असर यह होगा कि योजना का काम लेट होगा और नर्मदा अभी कुछ समय और नालों के गंदे पानी से प्रदूषित होती रहेगी।
राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत शहर का एक ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाना था। इस सिस्टम के तहत शहर के नालों के गंदे पानी को पाइपलाइन के माध्यम से फिल्टर प्लांट तक ले जाया जाना था। वहां फिल्टर होकर पानी नर्मदा में मिलता। इस योजना पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पिछले दो साल से ज्यादा समय से काम रहा था। योजना के लिए टेंडर बुलाए गए थे। टेंडर करीब 6 करोड़ 55 लाख रुपए के आए। वहीं पीएचई ने जो एस्टीमेट बनाया था, वह 4 करोड़ 50 लाख का था। यानी एस्टीमेट से दो करोड़ रुपए अधिक के टेंडर आए थे। इन टेंडर को प्रमुख अभियंता कार्यालय भेजा गया था, जहां से टेंडर पास होकर शासन के पास स्वीकृति के लिए गए थे। शासन स्तर पर बनी कमेटी ने टेंडर अधिक राशि के होने के कारण इन्हें निरस्त कर दिया है। अब पीएचई से फिर से कम रेट के टेंडर बुलाने को कहा गया है। पीएचई के कार्यपालन यंत्री सुबोेध जैन ने बताया कि शासन से टेंडर अस्वीकृत होने के कारण अब नए सिरे से यह काम किया जाएगा। फिलहाल नर्मदा में मिल रहे नालों के पानी को रोकने का काम नहीं हो सकेगा।
योजना में यह काम होना है
योजनाका पूरा काम दो चरणों में होना है। ये टेंडर पहले चरण के लिए थे। इसमें मालाखेड़ी से लेकर भीलपुरा तक के घरों और काॅलोनी समेत करीब आधे शहर के पानी को ड्रेनेज सिस्टम से जोड़कर फिल्टर प्लांट तक ले जाया जाना है। इसी पाइपलाइन के माध्यम से नर्मदा में मिल रहे 8 बड़े नालों को जोड़ा जाना है। इसके लिए प्लांट भीलपुरा में बनना है। दूसरे चरण में रसूलिया, ग्वालटोली, एसपीएम आदि क्षेत्रों के पानी को पाइपलाइन के जरिए वहां का पानी डोंगरवाड़ा में बनने वाले प्लांट तक ले जाया जाना है। अब पहले चरण के लिए ही फिर से टेंडर की प्रक्रिया होना है।
यहां मिल रहे नाले
नर्मदामें छोटे और बड़े नाले मिल रहे हैं। सबसे बड़ा नाला कोरीघाट का है। इसके अलावा विवेकानंद घाट, वीर सावरकर घाट, परमहंस घाट, कमिश्नर