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मुख्यमंत्री तय करेंगे मूंग के लिए पानी मिलेगा या नहीं
इसबार मूंग की फसल के लिए तवा परियोजना से पानी मिलेगा या नहीं इस बात का फैसला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। प्रमुख सचिव जल संसाधन विभाग के साथ 15 फरवरी को होने वाली बैठक में इस मामले में फैसला होगा। प्रमुख सचिव तवा परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर 5 फरवरी को भोपाल में अच्छा खासा मंथन कर चुके हैं। दरअसल मूंग को पानी देना चाहिए या नहीं इसको लेकर जल संसाधन विभाग इस वर्ष इसलिए धर्मसंकट में हैं कि यदि पानी देते हैं तो उनकी 90 करोड़ की लाइनिंग की परियोजना फिर एक साल के लिए लंबित हो जाएगी। 40 साल पुरानी मेन केनाल में लाइनिंग का काम सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहद जरूरी बताया गया है।
मूंगया प्रोजेक्ट किसी एक को चुनना पड़ेगा
पिछलेसीजन के अनुभव से जल संसाधन विभाग को यह बखूबी समझ रहा है कि यदि मूंग को पानी दिया तो लाइनिंग का काम किसी सूरत में नहीं होगा। जो परिस्थितियां रहती हैं उसमें एक लाख हेक्टेयर में मूंग की फसल के लिए यदि पानी नहीं दिया तो राजनैतिक और किसानों का विरोध दोनों ही बर्दाश्त करना पड़ेगा। ऐसी सूरत में प्रोजेक्ट छोड़ने या मूंग के लिए पानी देना, किसी भी तरह का फैसला लेना जल संसाधन विभाग के लिए धर्म संकट बन गया है। इसलिए 5 फरवरी को प्रमुख सचिव जल संसाधन विभाग राधेश्याम जुलानिया के साथ चीफ इंजीनियर, ईएनसी और कार्यपालन यंत्री सहित अन्य की बैठक हुई जिसमें तमाम बिंदुओं पर चर्चा हुई।
सीएम की बैठक के बाद तय होगा
^मूंगकाे पानी मिलेगा या नहीं अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता। करीब 90 करोड़ के लाइनिंग प्रोजेक्ट का काम अटका हुआ है। प्रमुख सचिव और सीएम की बैठक के बाद साफ होगा कि इस बार मूंग के सीजन पर पानी मिलेगा या नहीं। एकेजाटव, कार्यपालन यंत्री, तवा परियोजना
16 स्ट्रक्चर के लिए भी लगे टेंडर
लाइनिंगके काम के अलावा 40 किमी के इस दायरे में 12 ड्रेनेज क्रास स्ट्रक्चर और 4 एक्वाडक्ट के स्ट्रक्चर के निर्माण के लिए दो करोड़ रुपए के काम के टेंडर अभी हाल ही में लगे हैं। यह सभी स्ट्रक्चर 40 साल पुराने है और पत्थर जुड़ाई से बने होने के कारण अपनी औसत आयु भी पूरी कर चुके हैं। ऐसे में इनका पुर्ननिर्माण जरूरी बताया जा रहा है। यदि इनमें से एक भी ध्वस्त होता है तो उसके बाद रबी सीजन की ढाई लाख हेक्टेयर और मूंग की एक लाख हेक्टेयर की सिंचाई ही नहीं हो पाएगी।
यह है तवा परियोजना
इसलिए जरूरी है अब लाइनिंग का काम
{पानीप्रवाह की स्पीड और प्रेशर बढ़ेगा जिससे टेल एरिया को आसानी से पानी मिलेगा।
{मुख्य नहर के टूटने का खतरा लगभग खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही 30 फीसदी पानी का लॉस भी खत्म हो जाएगा।
इसलिए नहीं मिलती नहर खाली
{रबीसीजन में 20 अक्टूबर से 10 मार्च तक नहर में पानी छोड़ा जाता है। इसमें 1400 एमसीएम पानी छोड़ा जाता है। जिससे ढाई लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती है।
{15 मार्च से 15 मई तक एक पलेवा और दो पानी दिया जाता है जो कि 500 एमसीएम तक होता है।
{तवा परियोजना की लेफ्ट बेंक केनाल में 90 करोड़ में 40 किमी मेन केनाल की लाइनिंग का काम होना है।
{चेन 0 से 214 तक 6 किमी में पहले ही लाइनिंग का काम हो चुका है।
{चेन 214 से लेकर चेन 1526 तक यह लाइनिंग का काम होना है।
{जिसमें 4 मार्च 2014 को टेंडर लगाए गए थे।
{टेंडर के बाद सरोठिया वेलजी र|ा बड़ौदा की कंपनी से एग्रीमेंट कर वर्कऑर्डर जारी किया गया।
{कंपनी ने 25 से 30 मई 2014 के मध्य चेन 1307 से 1352 के बीच अर्थ वर्क और बेड में लाइनिंग का काम किया। इसके बाद से काम बंद है।
तवा परियोजना और उसकी नहरों का नक्शा जिसमें मेन केनाल मोटी लाल रंग में नजर रही है।
तवा परियोजना का जल भराव क्षेत्र
200 वर्ग किमी
फुल स्पीड पानी छोड़ा गया
1 नवं.1978
नहर से पहली बार पानी छोड़ा
1 अक्टू.1976
परियोजना का काम पूरा हुआ
1978
बनने की शुरुआत
1968