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राष्ट्रीय संस्थानों में छात्रों के लिए फीस और अंग्रेजी बन रही समस्या
छोटेशहरों और ग्रामीण अंचलों से बड़े और राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई के लिए जाने वाले स्टूडेंट्स की पहली समस्य वहां की फीस और कक्षाओं में बोली जाने वाली अंग्रेजी होती है। ये बात श्री रमेश प्रकाश सामाजिक संस्थान के भारत कॉलिंग प्रोजेक्ट के वािर्षक सम्मेलन में आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों से राष्ट्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई करने जाने वाले स्टूडेंट्स ने बताई। जबलपुर से आईं नेशनल यूनिवर्सिटी स्टूडेंट स्किल डवलपमेंट प्रोग्राम की प्रदेश इंचार्ज डेविस यादव ने बड़े संस्थानों में आने वाली समस्याओं से निपटने के तरीके भी बताए। वार्षिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में जीवोदय की सिस्टर क्लारा, सुनीता बाधवा, विजय चौधरी, राहुल मेहतो, प्रीति मालवीय, निर्मला मालवीय उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन संस्था के संस्थापक संदीप मेहतो और प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर रुचिका ने किया। डेविस ने ग्रामीण स्टूडेंट्स को शिक्षण संस्थानों में आने वाली समस्याओं और उनके समाधान की जानकारी दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स उपस्थित थे।
स्टूडेंट्स को बताए समस्याओं के समाधान
समस्या : ग्रामीणऔर छोटे शहरों के स्टूडेंट्स रहन सहन से प्रभावित होकर शिकार होते हैं।
समाधान
स्टूडेंट्सको अपनी संस्कृति और पहचान को सबसे बेहतर मानकर ही व्यवहार करना चाहिए। यह बात ध्यान में रखना चाहिए िक बाकी सभी स्टूडेंट्स के साथ वे भी कठिन चयन परीक्षा को पास करके वहां पहुंचे हैं।
समस्या: अंग्रेजीसे घबराकर ग्रामीण स्टूडेंट्स हीन भावना का शिकार होते हैं।
समाधान
डेविसने बताया कि कहीं भी यह नियम लागू नहीं होता कि आप हिंदी में अपने विचारों की प्रस्तुति नहीं दे सकते। शुरुआत में अंग्रेजी समझ नहीं आए तो शिक्षकों से संपर्क करें। पुस्तकों को पढ़कर शब्दों को समझने की आदत डालें।
समस्या : बड़ेशिक्षा संस्थानों में पहली समस्या फीस भरने की हाेती है।
समाधान
संस्थानोंमें बेहतर पढ़ाई के साथ जरूरतमंद स्टूडेंट्स के आर्थिक सहयोग के लिए पर्याप्त स्कालरशिप की व्यवस्थाएं होती हैं। चयन परीक्षा पास करने के बाद स्टूडेंट को सबसे पहले स्कालर सोर्स की जानकारी लेना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों के स्टूडेंट्स की समस्याओं और उनके समाधान पर हुई चर्चा