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विज्ञान के प्रयोग में गलतियों से भी मिलती है सीख: डॉ. सिन्हा

7 वर्ष पहले
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एडीशनजब सौ रसायनों के उपयोग के बाद भी जब बल्ब का अाविष्कार नहीं कर सके तो उनके मित्र ने कहा कि ये कैसा विज्ञान है, अभी तक रिजल्ट नहीं मिला। तब एडीशन ने कहा 100 रसायनों के उपयोग ने रिजल्ट ही दिया है कि वे बल्ब के लिए उपयोगी नहीं हैं। इन सौ रसायनों की प्रकृति से मैं परिचित हुआ हूं। विज्ञान के प्रयोग में की हुई गलती भी एक नया पाठ सिखाती है। आज एडीशन के नाम पर जितने पेटेंट हैं उतने किसी और वैज्ञानिक के नाम पर नहीं हैं। यह बात विज्ञान प्रसार के पूर्व डायरेक्टर और भारत सरकार के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार डॉ.अनुज सिन्हा ने स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए कही। ट्राइबल साइंस कम्युनिकेशन एंड सोशल वेलफेयर सेंटर के तत्वावधान में नालंदा मॉडल स्कूल और गुरुनानक पब्लिक स्कूल में वैज्ञानिक जागरूकता अभियान का आयोजन हुआ। डॉ.सिन्हा ने स्टूडेंट्स और शिक्षकों से आने वाली वैज्ञानिक चुनौतियों, जलवायु परिर्वतन और विज्ञान और गणित की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर चर्चा की। इस अवसर पर डॉ.केएस उप्पल, राजेश पाराशर, संदीप तिवारी, अजय चौकसे, जसपाल सिंह भाटिया, गुरवीर सिंह सीनियर, जसबीर छाबड़ा उपस्थित थे।

स्टूडेंट्सने पूछे सवाल

वैज्ञानिकजागरूकता कार्यक्रम में इशिता मालवीय, शीर्ष चौकसे, आकाश साहू, शौर्य चौकसे ने वर्षा के कारणों, ओजोन लेयर ट्रीटमेंट, बदलती जलवायु और ग्रहण से संबंधित जिज्ञासु सवाल पूछे। शिक्षकों ने भी विज्ञान को रोचक और प्रयोग आधारित शिक्षण के लिए सवाल पूछे और अपनी समस्याएं बताईं।

> नालंदा मॉडल स्कूल में वैज्ञानिक जागरुकता पर हुआ आयोजन

यह भी बताया

>भारत के पास 20 से अधिक न्यूक्लियर एनर्जी पावर प्लांट हैं।

> 20 साल पहले ब्लड स्टोरेज बेग जापान से आता था अब हाईटेक ब्लड स्टोरेज बैग भारत में बनता है जिसमें तीन हिस्से होते हैं एक में डेड सेल्स, एक में उपयोगी रक्त और एक में उसे सुरक्षित रखने वाला रसायन होता है।

> मिसाइल के रसायन से डॉ.कलाम ने मेडिकल साइंस की मदद से पोलियोग्रस्त हड्डियों के लिए हल्के उपकरण बनाए।

> भारत पहला देश है जो मंगल यान के माध्यम से सबसे पहले सफलता से मंगलग्रह पर पहुंचा।

> ओजोन लेयर ट्रीटमेंट के लिए 196 देशों ने एक साथ एग्रीमेंट किया है।