बाललीलाओं को सुन आनंदित हुए श्रद्धालु
इटारसी। कन्हैयाने मिट्टी खाई, मां यशोदा ने फटकार लगाई और जब मुंह खुलवाया तो मां यशोदा ने कन्हैया के मुंंह में ब्रह्मांड के दर्शन हुए, पूतना भगवान को विषपान कराने आई और कृष्ण ने विष के साथ पूतना के प्राण भी पी लिए और उसे राक्षस योनी से मुक्ति दे दी। जमुना किनारे गोपियों के वस्त्र चुराकर कृष्ण ने जलाशय में बिना वस्त्र स्नान करने की शिक्षा दी। श्रीकृष्ण के बालपन की एसी अनेक शिक्षाप्रद लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन दीवान कॉॅलोनी में आयोजित भागवत कथा को विस्तार देते हुए कथावाचक पंडित जगदीश प्रसाद पांडे ने किया। कथा को विस्तार देते हुए कथावाचक ने कहा कि राम की लीलाएं अनुसरण योग्य और श्रीकृष्ण की लीलाएं सीख लेने वाली हैं।