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सड़क और पानी जैसी सुविधाओं से महरूम शहर के 10 हजार लोग

7 वर्ष पहले
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शहरसे लगा हुआ एक ऐसा भी क्षेत्र है जो व्यवहारिक रूप से शहर का हिस्सा है लेकिन प्रशासनिक रूप से ग्राम पंचायत में आता है और यहां पर सबसे बड़ा दखल रेलवे का है। यह क्षेत्र जिसे न्यू यार्ड कहा जाता है, उसके दो चेहरे हैं। एक चेहरे में विकास कार्य नजर आते हैं और दूसरे चेहरे में बदहाली नजर आती है। जो दूसरा चेहरा है उसमें लगभग 10 हजार वाशिंदे मूलभूत सुविधाओं से महरूम है और इन सुविधाओं को लेकर कई बार आवाज उठा चुके हैं मगर यहां विकास की जिम्मेदारी उठाने के लिए कोई भी एजेंसी तैयार नजर नहीं रही है।

यार्ड क्षेत्र में भी दो तरह की स्थितियां हैं। यहां पर आधा क्षेत्र रेलवे के आधिपत्य में है और तकरीबन एक हजार सं अधिक रेलवे क्वाटर बने हुए हैं। जहां रेलवे ने हर संभव सुविधाएं उपलब्ध कराई है, विकास कार्य करवाएं हैं। जबकि इसी क्षेत्र से लगे हुए अन्य हिस्से में भी करीब इतने ही मकान है लेकिन यहां पर विकास कार्य जैसा कुछ भी नहीं है। इस स्थिति में निजी क्षेत्र के वाशिंदे रेलवे की सुविधाएं देखकर रश्क करते हैं। क्षेत्र के निवासियों ने बताया कि क्षेत्र की हालत को लेकर वे हर मंच पर अपनी बात रख चुके हैं लेकिन आश्वासन के अलावा उनके खाते में कुछ नहीं आता है। जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक ज्ञापन के माध्यम से कई बार अपनी समस्याएं बता चुके हैं। इनका कहना है कि बारिश में तो इस क्षेत्र की कच्ची सड़कें दलदलनुमा हो जाती है। उनका कहना है कि यदि पंचायत विकास कार्य करने में रूचि नहीं रखती है तो इसे नगर पालिका में शामिल कर दिया जाए। वैसे भी यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से शहर का ही हिस्सा है। क्षेत्रवासी नरेंद्र वर्मा ने बताया कि इस क्षेत्र की घोर उपेक्षा की गई है। यहां मूलभूत सुविधाएं नदारद है। लगभग 8 से 10 हजार की आबादी रहती है। मगर इसके बाद भी इस क्षेत्र की उपेक्षा होती है। हमारा कहना है कि इसे नपा से जोड़ा जाए तब कुछ विकास हो सकता है।

सरपंच सचिव बोले

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