पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • सात साल में हुए 44 लाख खर्च, फिर भी शहरवासियों को नहीं मिली सुविधा

सात साल में हुए 44 लाख खर्च, फिर भी शहरवासियों को नहीं मिली सुविधा

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नपा की वेबसाइट भी अपडेट नहीं , कम्प्यूटरीकरण बेकार, नही हो रहा ऑनलाइन काम

नगरपालिकामें पारदर्शिता और आम आदमी की सुविधा के लिए सभी शाखाओं को आॅनलाइन करने के लिए कंप्यूटरीकरण योजना शुरू की गई लेकिन योजना पर लगभग 44 लाख खर्च करने के बाद भी हालत यह है कि नपा कामकाज का पुराना ढर्रा ही चल रहा है। आज भी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र पहले की प्रक्रिया से बन रहे हैं, आॅनलाइन कंप्यूटराइज्ड प्रमाणपत्र नहीं दिए जा रहे हैं। योजना पर शुरू से ही विवाद चल रहा है लेकिन हाल ही में संपन्न हुए नपा परिषद के सम्मेलन में इस योजना के लिए फिर से 9 लाख की स्वीकृति के प्रस्ताव से योजना को लेकर सवालिया निशान लगने लगे हैं और पूरी योजना की जांच की मांग नए सिरे से उठने लगी है। कुल मिलाकर कम्प्यूटरीकरण बेकाम साबित हुआ और ऑनलाइन काम होने से आम शहरवासियों को जो सुविधा मिलने था वह नही मिल रही है।

कर्मचारीअभी भी कंप्यूटर से दूर

इसयोजना के तहत टेंडर लेने वाली कंपनी स्काईनेट कंपनी को नगरपालिका के कर्मचारियों को कंप्यूटर से संबंधित प्रशिक्षण देना था लेकिन आज भी स्थिति यह है कि नगरपालिका के ज्यादतर कर्मचारियों का कंप्यूटर से बहुत विशेष वास्ता नहीं है। इसीलिए नगरपालिका में राशनकार्ड, जन्म-मृत्यु, बिल्डिंग परमीशन जैसी जैसे कामों के लिए आम आदमी को जो आॅनलाइन सुविधाएं मिलना चाहिए वे बिल्कुल नहीं मिल रही हैं। आज भी उन ज्यादातर कामों में कागजी कार्रवाई ही अपनी सुस्त रफ्तार से चलती है जिससे आम आदमी का सीधे वास्ता होता है।

कंपनीके कमरे तक सिमटकर रह गया उद्देश्य

कंप्यूटरीकरणकी हकीकत देखी जाए तो यह नपा में स्काईनेट कंपनी के उस कमरे तक ही सिमटकर रह गई जिसे कंपनी ने अपना कंट्रोल रूम बना रखा है। वर्तमान में जो कर्मचारियों की आनलाइन वेतन भुगतान जैसी प्रक्रिया चल रही है वह यहीं से संचालित होती है। इसके लिए कंपनी ने अपने आपरेटर रखे हुए हैं जबकि कायदे से योजना के अनुसार नपा कर्मचारियों द्वारा अपनी-अपनी शाखाओं में कामकाज आनलाइन करना था और सभी शाखाएं एक-दूसरे से आनलाइन जुड़ी हुई होना था लेकिन ऐसा वर्तमान में है नहीं। नपा की अपनी बेवसाइट है। पर वही भी अपडेट नहीं है।

ये हैं आपत्तियां

1.पांचसाल में भी काम पूरा होने के बाद भी नए सिरे से टेंडर नहीं किए गए।

2.कंपनी को सभी शाखाओं में हार्डवेयर लगाना था जो नहीं है।