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डॉक्टर उद‌्घाटन में व्यस्त, घंटों बैठे रहे मरीज, प्राइवेट में कराया इलाज

6 वर्ष पहले
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शासकीयडॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी अस्पताल में सोमवार को ओपीडी के समय करीब दो घंटे तक कोई भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। जिससे यहां आने वाले मरीज परेशान हुए। मरीजों के साथ आए परिजनों ने अस्पताल के अन्य स्टाफ से पूछा तो पता चला कि सभी डॉक्टर पुरानी इटारसी में आजाद चौक के पास खुल रहे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के उद‌्घाटन में गए हुए हैं। उद‌्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुबह 10.30 बजे अस्पताल के करीब आधा दर्जन चिकित्सक एक-एक कर चले गए जो दोपहर 1 बजे के आसपास लौटे। इस दौरान आए मरीजों ने डॉक्टर से जांच कराने के लिए घंटों बेंच पर इंतजार किया। अस्पताल में सुबह ओपीडी में सबसे ज्यादा भीड़ बच्चों की रही जिन्हें सर्दी-खांसी और बुखार था। वहीं इक्का-दुक्का को छोड़कर अधिकांश एएनएम ट्रेनी भी सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक अस्पताल से नदारद थीं।

घंटोंइंतजार के बाद निजी क्लीनिक गए मरीज

डॉक्टरनहीं होने से पहले मरीजों ने घंटों इंतजार किया। फिर निजी अस्पताल चले गए। एलआईसी ऑफिस के बाजू में रहने वाले विजय बाथरी ने बताया कि उनकी दो बेटियाें को बुखार और सर्दी-खांसी की शिकायत है। अगर जानकारी होती तो वे सरकारी अस्पताल नहीं आते।

डॉ. श्यामप्रसाद मुखर्जी अस्पताल में सुबह 12.10 बजे खाली पड़ी कुर्सियां।

अस्पताल से ज्यादा डॉक्टर और एएनएम ले जाना गलत

^यदि ऐसा हुआ है तो गलत है। कार्यक्रम में आयोजक के रूप में अधीक्षक एक दो स्टाफ के कर्मचारी और गणमान्य नागरिक होना चाहिए था। अस्पताल के अधिकतम डॉक्टर और एएनएम को ले जाना गलत है। ऐसे में तो व्यवस्था लड़खड़ाएगी, मैं जिम्मेदार से बात करता हूं। डॉ.एएल मरावी, सीएमएचओ।

बच्ची बुखार से बेहाल, एक घंटे बाद बताया कोई नहीं है

^मेरीबच्ची को सर्दी-खांसी और बुखार है, उसका इलाज कराने आया हूं। एक घंटे से ज्यादा बीतने के बाद भी यहां कोई डॉक्टर नहीं है। पूछने पर बताया कि सभी उद‌्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने गए हैं। वहां से आने के बाद ही मरीज को देखेंगे। जानकारी होती तो पहले ही निजी अस्पताल में ले जाते। कैलाशशर्मा, नेहरूगंज, इटारसी।

सीधी बात

भास्कर: आजसुबह की आेपीडी में डॉक्टर मौजूद नहीं थे।

अधीक्षक:आपकोगलत जानकारी है, डॉक्टर टिकारिया, दुबे, शिवानी, गुप्ता, बड़ौदिया सभी तो मौजूद थे।

भास्कर:हमारेपास फोटो हैं सभी ओपीडी के समय उद्घाटन कार्यक्रम में थे।

अधीक्षक:आपकेयदि घर का उद्घाटन होता तो क्या आप नहीं जाते।

भास्कर:यदिऐसा हैं तो ओपीडी के समय एक दो डॉक्टर की ड्यूटी लगाना था।

अधीक्षक:ऐसानहीं है महिला डॉक्टर की ड्यूटी थी, इस दौरान अस्पताल में दो सीजेरियन ऑपरेशन भी हुए हैं।

भास्कर:वोतो ओटी में व्यस्त होंगी, सामान्य मरीज को देखने के लिए क्या व्यवस्था थी।

अधीक्षक:एकडॉक्टर और थे, जब आप गए होंगे शायद वो राउंड पर हों।

भास्कर:शुरूमें आपने तो कहा था कि सब मौजूद थे और अब एक डॉक्टर वो भी ओपीडी के समय राउंड पर चला गया!

अधीक्षक:आजशहर में अच्छा काम हुआ है, आप उसकी चर्चा कीजिए अब इन नकारात्क प्रश्नों का मैं क्या उत्तर दूं।

भास्कर:लेकिनइतना तो आप मानेंगे डॉक्टर नहीं होने से मरीज परेशान हुए, कुछ तो निजी क्लीनिक तक चले गए।

अधीक्षक:ऐसानहीं है, यदि होता तो मरीजों को हमें फोन करना चाहिए था।

आज शहर में अच्छा काम हुआ है आप उसकी बात कीजिए : अधीक्षक

स्वास्थ्य केंद्र के लोकार्पण अवसर पर मौजूद डॉक्टर (लाल घेरे में)।

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