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कार्यसंस्कृति के पोषण के लिए जरूरी है समय प्रबंधन

6 वर्ष पहले
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हमजैसा सोचते हैं वैसा ही बनते हैं, हम जैसा बनते हैं वही हमारा व्यक्तित्व होता है। व्यक्तित्व बनाने के लिए समय प्रबंधन होना जरूरी है। यह बात कानपुर उत्तर प्रदेश से आए डॉ.यशभान िसंह तोमर ने नेशनल वर्कशॉप के तकनीकि सत्र को दूसरे दिन संबोधित करते हुए कहा। विषय प्रवर्तन करते हुए छिंदवाड़ा से आए डॉ.लक्ष्मीकांत चंदेला ने कहा कि कार्यसंस्कृति कार्य करने की परिष्कृत पद्धति है। समय प्रबंधन के साथ काम करने की शैली का पोषण करने के लिए समय प्रबंधन होना जरूरी है। एमजीएम कॉलेज में आयोजित तीन दिनी वर्कशॉप के दूसरे दिन विद्वानों ने कार्यसंस्कृति और व्यक्तित्व विकास में समय प्रबंधन का महत्व बताया। दूसरे दिन तकनीकि सत्र का संचालन डॉ. विनोद कुमार कृष्ण और आभार प्रदर्शन डॉ.मालविका गुहा ने किया।

वर्कशॉप में दूसरे दिन उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र और मप्र के अलग- अलग शहरों से आए विद्वानों ने संबोधित किया। मंच पर विशेष वक्ता के रूप में कानपुर उत्तरप्रदेश के डॉ.कैलाश विश्वकर्मा, डॉ.यशभान सिंह तोमर, छिंदवाड़ा के लक्ष्मीकांत चंदेला, नरसिंपुर के सीएस राजहंस, छत्तीसगढ़ दुर्ग के डॉ.देशबंधु तिवारी, विदिशा की डॉ.कमल चतुर्वेदी उपस्थित थीं।

कार्य संस्कृति और व्यक्तित्व विकास विषय पर आयोजित नेशनल वर्कशॉप में दूसरे दिन मुख्य वक्ता के व्याख्यान के बाद बड़ी संख्या में प्रदेशभर से आए प्राध्यापकों और रिसर्च स्कॉलर ने भी अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस अवसरपर पचमढ़ी के डॉ.पंकज साहू, बनखेड़ी की डॉ.संगीता साहू, इटारसी की दमयंती सैनी, भोपाल की डॉ.गीता परियानी ने व्याख्यान दिया।