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हॉस्टल के पांच कमरों में 61 बिस्तरों पर सोते हैं 254 बच्चे
सिटी रिपोर्टर|इटारसी/सुखतवा
पांचकमरे, 61 बेड और 254 बच्चे! अब ऐसे में यह बच्चे इन कमरों और इन बिस्तरों पर कैसे गुजर-बसर करते होंगे। इस बात का तो उन प्रशासनिक अधिकारियों को अहसास भी नहीं होगा, जिन्होंने सुखतवा में यह सिस्टम बनाया है। सुखतवा के आदिवासी हॉस्टल के 11 कमरों में चार शैक्षणिक संस्थाओं का संचालन शुरू तो करवा दिया, लेकिन वहां सुविधाएं जुटाने को लेकर किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया।
हालत यह है कि यहां पर एक बिस्तर पर तीन-तीन छात्र बमुश्किल सो पाते हैं। चूंकि यह सभी छात्र गरीब आदिवासी तबके के हैं, इसलिए वे मजबूरी में यह सब चुपचाप बर्दाश्त कर रहे हैं। सुखतवा जिले के आखिरी छोर पर है, इसलिए प्रशासन भी यहां बहुत ज्यादा मॉनिटरिंग पर ध्यान नहीं देता। पीडब्ल्यूडी मंत्री सरताज सिंह के विधानसभा क्षेत्र में यह स्थितियां बनने का बड़ा कारण उनका पीडब्ल्यूडी विभाग ही है, जो पिछले तीन साल में कॉलेज और एकलव्य आवासीय विद्यालय का भवन ही नहीं बना पाया।
हायर सेकेंडरी स्कूल का है यह भवन
यह चार संस्थाएं अलग-अलग कमरों में लग रही हैं। एक बिल्डिंग में हायर सेकेंडरी स्कूल का भवन है। यह नया भवन इसलिए बनाया गया था ताकि हायर सेकेंडरी स्कूल के जर्जर हो रहे कमरों में कक्षाओं को बंद करके यहां शिफ्ट किया जाए, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। यहां इन 4 संस्थाओं का कब्जा हो गया।
हमें बच्चों की चिंता है
^बिल्डिंगका टेंडर लग गया है, काम भी शुरू होने वाला है। हमें भी बच्चों की चिंता है।^ वीकेबाथम, आयुक्त नर्मदापुरम
बिजली भी है यहां बड़ी समस्या
छात्रावासके छात्रों ने बताया कि रात में यहां वोल्टेज नहीं रहता जिससे बल्ब चिमनी जैसे जलते है। कम रोशनी की वजह से वे पढ़ाई नहीं कर पाते। दरअसल, सुखतवा में रात में सिंगल फेज बिजली मिलती है। हॉस्टल गांव से बाहर है। वोल्टेज डाउन हो जाता है।
भेड़ बकरियों की तरह रह रहे बच्चे
पांचकमरों में 250 बच्चे किस तरह रह सकते हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। छात्रों ने बताया कि बेड कम होने से दाे-दो, तीन-तीन बेड जोड़कर किसी तरह सो पाते हैं। ठंड के दिन चल रहे हैं, इसलिए फर्श पर बिछाकर भी नहीं सो सकते। छात्रों ने यह भी बताया कि निरीक्षण करने वाले आते हैं लेकिन वे भी देखकर चले जाते हैं।
इसलिए है यह हालात
{एकलव्यआवासीय विद्यालय 2011 से शुरू हुआ। इसके लिए जमीन भी आवंटित हो गई। भवन निर्माण भी शुरू हो गया है लेकिन सुस्त रफ्तार के कारण कुछ कमरों में ही संचालन हो रहा है।
{इसी तरह 2011 से शुरू शासकीय कॉलेज के लिए भी इस भवन के ठीक पीछे जमीन और उस पर भवन बनाने के लिए 3 करोड़ का बजट मिलने के बाद भी निर्माण का काम ले आउट के आगे नहीं बढ़ा।
प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास
इस50 सीटर छात्रावास को दो कमरे दिए गए हैं। वैसे यह छात्रावास पहले वहां लगता था जहां एकलव्य छात्रावास की लड़कियां रहती है। लड़कियों को इनका भवन देकर इन्हे दो कमरों में रखा जा रहा है।
एकलव्य आवासीय विद्यालय
इसविद्यालय की कक्षाएं 11 से 4 बजे के दौरान उन्हीं चार कमरों में लगती हंै, जहां कॉलेज की कक्षाएं लगती हैं। दिन में इस विद्यालय का स्टाॅफ कॉलेज के प्राध्यापकों के स्टाफ रूम का उपयोग करता है।
एकलव्य आदर्श छात्रावास
इसछात्रावास में लड़कों की दर्ज संख्या 204 है। वहीं लड़कियों की दर्ज संख्या 87 है। यह 204 छात्र तीन कमरों में रहते हैं, वहीं लड़कियों को पीछे एक अन्य पुराने भवन में रखा जा रहा है।
एक बिल्डिंग में चार संस्थाएं
शासकीयकॉलेज
यहांपर कॉलेज के प्राचार्य और स्टाफ के लिए दो रूम आरक्षित हैं। वहीं चार कमरों में सुबह 7 से 11 में कॉलेज की कक्षाएं लगती हैं। इस कॉलेज में बीए और बीएससी में 309 विद्यार्थी पढ़ते हैं।
सुखतवा के आदिवासी हॉस्टल में शुक्रवार की रात जब भास्कर टीम पहुंची तो हॉस्टल में रहने वाले बच्चे बेड को जोड़कर किसी तरह सो रहे थे।