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दो दिन बाद होना है मतदान अब तक नहीं आई गाइडलाइन
कॉलेजोंमें सेमेस्टर प्रणाली पर फैसला करने की जिम्मेदारी छात्रों पर छोड़ने के बाद उच्च शिक्षा विभाग मतदान प्रणाली को लेकर गाइडलाइन जारी करना ही भूल गया। यही कारण है, कि कॉलेजों में इसको लेकर किसी भी स्तर पर कोई तैयारी ही नजर नहीं रही हैं और छात्र वर्ग भी ऊहापोह की स्थिति में नजर रहा है। मतदान के लिए जो तारीख 29सितंबर तय की गई है उसको महज दो दिन बचे हंै और काॅलेजों के पास मतदान प्रक्रिया से जुड़े मूलभूत सवालो का जवाब ही नहीं है इसलिए होने वाले मतदान की तैयारियां भी काॅलेजों में सिफर नजर रही हंै। इन हालातों में उच्च शिक्षा विभाग के इस जनमत संग्रहनुमा प्रयास की उपयोगिता पर ही सवालिया निशान लग गया है।
छात्रों की मतदान प्रक्रिया की तैयारियों को लेकर जब कॉलेजों द्वारा उच्च शिक्षा विभाग में संपर्क किया जाता हंै तो वहां से कोई भी ठोस जवाब नहीं मिलता है। सामान्य ताैर यही कहा जाता है कि समय आने पर बता देंगे। किसी भी तरह की गाइड लाइन ना होने के कारण काॅलेज भी अब सुस्त मुद्रा में गए हैं। काॅलेजों का कहना हैं, कि इस मामले में जब से मतदान से फैसला लेने की अधिकारिक जानकारी सामने आई हैं तब से वे कई बार इस मुद्दे पर संपर्क कर चुके हंै मगर उच्च शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी गाइडलाइन को लेकर अनभिज्ञ ही नजर आते हैं। यह सवाल भी सामने रहा है, कि मतदान में प्राइवेट छात्र और प्राइवेट काॅलेजाे की क्या भूमिका होगी?, मतदान के बाद मतगणना तत्काल होगी? परिणाम तत्काल सार्वजनिक होंगे या फिर गोपनीय रखे जाएंगे?
इस मामले में मतदान को लेकर जब अलग अलग सेमेस्टर के छात्रों से चर्चा की गई तो यह सामने आया कि वे इस जनमत संग्रह के उद्देश्य के प्रति अपना कोई भी नजरिया नहीं बना पाए। मसलन जब स्नातक प्रथम सेमेस्टर के छात्रों से सेमेस्टर प्रणाली पर उनकी पसंद अौर ना पसंद को लेकर जब सवाल किया गया तो यह छात्र असमंजस की मुद्रा में नजर आए। तीसरे एवं चौथे सेमेस्टरों के छात्रों से चर्चा की गई तो कुछ तो इसके विरोध में नजर आए वही कुछ छात्रों ने इसे फायदेमंद भी बताया। वैसे छात्र संगठन इस प्रणाली का विरोध करते रहे है मगर इस प्रणाली को बदले जाने की सबसे बडी वजह काॅलेजों में प्राध्यापकों और स्टाफ की कमी बताई जा रही हंै।
गाइडलाइन नहीं मिली
^अभीतक तो किसी तरह की कोई गाइडलाइन नहीं मिली है और उच्च शिक्षा विभाग स