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ऑफ सीजन में लहसुन से हांफी मंडी

7 वर्ष पहले
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ऑफसीजन में लहसुन की बंपर आवक से डॉ. काटजू कृषि मंडी हांफ गई। गुरुवार को लहसुन अड्डे के साथ मसाला अड्डा भी लहसुन के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से भर गया। बंपर आवक से प्रांगण भरने के बाद मंडी प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए और किसानों से 23 सितंबर तक लहसुन मंडी लाने की अपील की। जगह की कमी देखते हुए भारतीय किसान संघ ने फिर लहसुन-प्याज को छोड़ बाकी उपज अरनियापिथा नई मंडी भेजने की मांग की।

साउथ में डिमांड बढ़ने से कृषि मंडी में लहसुन के भाव क्वालिटी अनुसार 2 हजार से 9 हजार रुपए प्रति क्विंटल रहे। इससे ऑफ सीजन के बावजूद मंडी में लहसुन की बंपर आवक हो रही है। गुरुवार को लहसुन भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली सहित 300 से ज्यादा लोडिंग वाहन मंडी आए तो जगह कम पड़ गई। लहसुन अड्डा खचाखच भरने के बाद वाहनों को मसाला जोन में खड़ा करना पड़ा। वाहन इतने थे कि मसाला जोन भी पूरा भर गया। इसके चलते मसाला जिंसें लेकर आए किसानों और व्यापारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।

लहसुनलाने पर प्रतिबंध-मंडी सचिववी.के. आर्य ने बताया मंडी में रोज 100 से 125 ट्रॉलियां नीलाम हो रही हैं। आवक 300 ट्रॉली तक पहुंच गई है। ऐसे में परेशानी बढ़ गई और जगह कम पड़ने लगी। रोड जाम हो इसलिए सभी वाहनों को प्रांगण में लेना पड़ा। अब जो लहसुन मंडी में है वह नीलाम होने में दो-तीन दिन लगेंगे। इसलिए 23 सितंबर तक किसानों से लहसुन नहीं लाने का कहा है।

लहसुन-प्याजछोड़ बाकी जिंसें नई मंडी ले जाएं-भारतीय किसानसंघ जिला उपाध्यक्ष शिवनारायण धाकड़ ने बताया अभी आॅफ सीजन में लहसुन की आवक इतनी है कि बाकी उपज रखने की जगह नहीं बची तो सीजन में क्या होगा। इसलिए जावरा मंडी में लहसुन और प्याज ही रखें। बाकी सभी जिंस मसाला उपज चने आदि अरनियापिथा नई मंडी में शिफ्ट करना चाहिए। अभी नई मंडी में सोयाबीन, गेहूं, अलसी रायड़ा ही नीलाम हो रहा है। वहां मसाला जोन इसके पास प्रांगण में सीमेंट-कांक्रीट का काम पूरा हो गया है। ऐसे में बाकी जिंसें भी वहां ले जाए ताकि यहां अव्यवस्था हो। इस मंडी में लहसुन-प्याज के अलावा जगह बचेगी ताे सब्जी मंडी संचालित की जा सकती है। सब्जी मंडी में भी जगह की कमी से किसान-व्यापारी परेशान हैं।

22 को देंगे ज्ञापन

किसानसंघ जिला उपाध्यक्ष ने बताया मंडी शिफ्ट करने की मांग को लेकर 22 सितंबर को बैठक करेंगे। इसके बाद प्रदेशस्तरीय मुद्दों के साथ मंडी शिफ्ट