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स्क्रीनिंग बंद, कैसे पता चलेगा किस बीमारी के कितने मरीज
स्वाइनफ्लू को लेकर प्रदेशभर में अलर्ट है लेकिन जिला अस्पताल में मरीजों की स्क्रीनिंग ही बंद कर दी गई है। इससे यह पता ही नहीं चलेगा कि किस बीमारी के कितने मरीज आए और इनमें से कितने गंभीर हैं।
अस्पताल में तीन दिन तक सर्दी, खांसी, बुखार के मरीजों की स्क्रीनिंग करने के बाद चौथे दिन से स्क्रीनिंग बंद कर दी। इसके पीछे जिम्मेदारों का तर्क है आंकड़े उजागर होने से लोगों में भय का वातावरण बन रहा है।
जिला अस्पताल में शुक्रवार, शनिवार और रविवार को मरीजों की स्क्रीनिंग की गई थी। इसमें 129 मरीज वायरल संक्रमित मिले। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग को अतिरिक्त सावधानी बरतना थी लेकिन सोमवार से स्क्रीनिंग ही बंद कर दी गई।
एकऔर संदिग्ध महिला भर्ती - मंगलवारको जिला अस्पताल में जावरा की एक 50 वर्षीय महिला को स्वाइन फ्लू होने की आशंका में भर्ती किया। वह जावरा के सागरपेशा की रहने वाली है। महिला चार दिन से रतलाम में रिश्तेदार की शादी में आई थी। उसके स्वाब का नमूना जांच के लिए भेजा है। महिला के परिजन ने बताया परिवार अथवा परिचितों में से किसी अन्य को महिला की बीमारी के तरह के लक्षण नहीं दिखे।
सख्ती से काम लेना पड़ेगा
जिलाअस्पताल के हालात से डिप्टी डायरेक्टर डॉ. वीरेंद्र कुमार हैरत में हैं। उन्होंने बताया अस्पताल प्रशासन के लोग मदद नहीं करेंगे तो हालात कभी नहीं सुधरेंगे। डॉ. कुमार ने बताया स्थिति सुधारने के लिए समन्वय बनाना चाहते थे, पर लगता है सख्ती से काम लेना पड़ेगा।
हर मरीज पर उख रहे हैं नजर, स्क्रीनिंग नहीं
^जिलाअस्पताल में इलाज के लिए रहे सर्दी-जुकाम के मरीजों पर हमारी नजर है। सभी का इलाज कर रहे हैं। स्क्रीनिंग से भय का माहौल बन रहा था, इस कारण बंद कर दी। डॉ.जीआर गौड़, नोडल अधिकारी स्वाइन फ्लू
तालमेल की कमी
जिलाअस्पताल में डॉक्टर्स के बीच तालमेल का अभाव अव्यवस्था है। डिप्टी डायरेक्टर के निर्देश के बाद सीएमएचओ पृथक वार्ड शुरू हो जाने की बात कहते रहे। सिविल सर्जन वार्ड के लिए उपयुक्त जगह तलाशते रहे और नोडल अधिकारी ने पहले वाले स्थान पर ही नए वार्ड का बोर्ड टंगवा दिया।
{ स्वास्थ्य विभाग के ओआईसी 4 5 फरवरी को जिला अस्पताल में निरीक्षण के लिए आए थे। आइसोलेशन वार्ड में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज रखे जाने पर उन्होंने आपत्ति ली थी। निर्देश दिए कि ऐसे मरीजों के लिए अलग व्यवस्थित कमरे का वार्ड तैयार करो। इसके ठीक उलट अस्पताल प्रबंधन ने आइसोलेशन वार्ड के ही एक कमरे के बाहर स्वाइन फ्लू वार्ड का बोर्ड लगवा दिया। इस कमरे में केवल दो पलंग हैं।
{ स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों के आसपास भी किसी को जाने नहीं दिया जाता है। यहां फ्लू के संदिग्ध मरीज के आसपास भीड़ लगी रहती है। नर्स, वार्ड बॉय आदि अस्पताल स्टाफ को भी मंगलवार को सुरक्षा उपकरण दिए गए।
{ बाल चिकित्सालय में एक बच्चे में डॉक्टर ने सोमवार दोपहर स्वाइन फ्लू के लक्षण देखे। इस बच्चे को अलग कमरे में रखने और उसके स्वाब का नमूना लेने के निर्देश दिए। दोपहर तक इस बच्चे का उपचार ही शुरू नहीं हो सका। परिजन उसे अस्पताल से लेकर चले गए। कहां गए, किसी को पता नहीं।
िजला अस्पताल के स्वाइन फ्लू की यह स्थिति है।