एकासना के तपस्वियों से भरा पंडाल
{3500 श्रावक-श्राविकाओं ने लिया एकासने की तपस्या में भाग
सिटीरिपोर्टर | रतलाम
चातुर्मासमें अब तक की सबसे बड़ी एकासने की तपस्या रविवार को धर्मदास जैन मित्र मंडल के तत्वावधान में की गई। इसमें 3500 श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। पूरा पंडाल तपस्वियों से भर गया। साथ ही अभिग्रहधारी पूज्य राजेशमुनि के 1008वें पारणा को लेकर अनुमोदनार्थ समारोह भी हुआ। सोमवार को मुनिश्री पारणा की क्रिया पूरी करेंगे।
रविवार सुबह सैलानावालों की हवेली मोहन टॉकीज हॉल में धर्मसभा हुई। इसमें राजेशमुनि ने कहा एकासनों की तपस्या का महत्व है। अभिग्रह तपस्या जीवनभर जारी रहेगी ताकि इससे कर्मों की निर्जरा होकर मोक्ष का द्वार खुल सके। राजेंद्रमुनि की मासक्षमण तपस्या तथा नवदीक्षित विजयमुनि के 9 उपवास की तपस्या पूरी होने पर अनुमोदन हुआ। हनुमानरूंडी पर 3500 श्रावक-श्राविकाओं के एकासने हुए। कार्यक्रम में जावरा, मेघनगर, खाचरौद, झाबुआ, शाहदा, कोपरगांव, थांदला, नागदा, बांगरोद, ताल, आलोट, इंदौर के श्रीसंघ भी शामिल हुए। जावरा आए इंदरमल टुकडिय़ा, राकेश मेहता, सुभाष टुकडिय़ा, आनंद राका आदि ने मुनिश्री से आगामी चातुर्मास जावरा में करने का आग्रह किया। कार्यक्रम के लाभार्थी आजादकुमार मेहता परिवार का श्रीसंघ द्वारा बहुमान किया। अरविंद मेहता, रखब चत्तर, जयंतीलाल मेहता, रमनलाल बोहरा, कांतिलाल मंडलेचा, भंवरलाल पुंगलिया, अशोक मूणत, सुरेश मूणत आदि उपस्थित रहे। संयोजक प्रकाश मूणत परिवार द्वारा लकी ड्रॉ में सोने की चेन दी गई। चेन चांदनीचौक निवासी फूलकुंवर पितलिया को मिली। ललित भंडारी, संजय मूणत, विनोद बाफना ने भी संबोधित किया।
फल मिलने में लगता है समय
आजका बोया आज ही फल नहीं देता। उसी तरह आज किए शुभ-अशुभ कर्मों का आज ही फल नहीं मिलता। जैसा व्यक्ति के भाग्य में लिखा है वह होकर रहता है। यह बात साध्वी भव्यकल्पाश्रीजी ने आराधना भवन में आयोजित धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा जो आज दुखी है उसने पिछले जन्मों में पाप कर्म किए थे। जो पापी है लेकिन फिर भी सुखी है तो मान लीजिएगा कि उसने पहले कोई शुभ कर्म किए होंगे। महिला मंडल अध्यक्ष सीमा लूनिया ने बताया आराधना भवन पर रोज सुबह 9 बजे साध्वीश्री के प्रवचन हो रहे हैं।