3 दिन में 75 लाख का लोबान बिका
दुकानदारों के अनुसार यहां तीन दिन में 50 टन लोबान बिकता है। दाम 80 रुपए से लेकर 250 रुपए किलो तक है। औसत 150 रुपए किलो प्रति किलो मानें तो एक क्विंटल के दाम 15 हजार रुपए होते हैं। 50 टन यानी 500 क्विंटल। औसत 15 हजार रुपए क्विंटल से 500 क्विंटल के हुए 75 लाख रुपए।
हुसैन टेकरी शरीफ पर लोबान की खूब बिक्री हुई।
भास्कर संवाददाता|जावरा
चेहल्लूमके आखिरी तीन दिन में 75 लाख से ज्यादा का लोबान बिका। इसकी छोटी-बड़ी, स्थायी-अस्थायी 125 दुकानें लगी हैं। लोबान का धुआं लेने की धार्मिक मान्यता है। ये आस्था ही है कि चेहल्लूम में यहां हजारों जायरीनों की भीड़ उमड़ती है और वे लोबान खरीदकर ले जाते हैं।
हुसैन टेकरी शरीफ पर रोज बड़ी संख्या में जायरीन आते हैं। हजरत इमाम हुसैन साहब के इस शिफा खाने में उनके चालीसवें पर 10 दिनी चेहल्लूम में लाखों लोग उमड़ते हैं। मान्यता है लोबान के धुएं की खुशबू लेने से दिमागी से लेकर सभी तरह की बीमारियों के मरीजों को सुकून मिलता है। इसके चलते चेहल्लूम के आखिरी दिनों में यहां लाखों का लोबान बिक जाता है। दुकानदार वसीम खान बताते हैं तीन दिन में 50 टन से ज्यादा लोबान बिकता है। हर दुकानदार चेहल्लूम में डेढ़ से दो लाख रुपए का माल भरता है। सरफराज मो. बताते हैं हुसैन के दीवानों की बढ़ती तादाद हर साल लोबान की खरीदी में इजाफा कर रही है।
रोजोंपर रोज होती है लोबान - यहांछह रोजे हैं। इमाम हुसैन का रोजा (बड़ा रोजा), इमाम हुसैन की बहन जनाबे जैनब का रोजा, इमाम हुसैन की बेटी जनाबे सकीना का रोजा, भाई अब्बास अलमदार का रोजा (छोटा रोजा), पिता मौला अली का रोजा (टाॅप शरीफ), मां जनाबे फातिमा (मेहंदी कुआं) का रोजा। सभी पर सुबह 7 से 9 और दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक रोज लोबान दिया जाता है।
सोनहलवा भी खूब बिकता है- सोनहलवा, अजमेर शरीफ दरगाह का मुख्य प्रसाद है। ये भी खूब बिकता है। दुकानदार शेख सफीर बताते हैं यहां लगी 15 दुकानों पर तीन दिन में 400 क्विंटल हलवा बिक जाता है। भाव 60 से 120 रुपए किलो तक है।
लाेगोंकी आस्था है
^लोबानके प्रति लोगों की आस्था है। इससे खरीदी बढ़ रही है। चेहल्लूम के आखिरी तीन दिन में 50 टन से ज्यादा लोबान बिकता है। सोन हलवे की डिमांड रहती है। मुज्जमिलरजा, अध्यक्ष-हुसैन टेकरी व्यापारी एसोसिएशन