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हमें मर्जी से धर्म में जाने की इजाजत

7 वर्ष पहले
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देशमें फ्रीडम ऑफ रिलिजन है। मर्जी से हमें किसी भी धर्म में जाने की इजाजत मिली है। यदि आज का धर्मांतरण नाजायज है तो कल का भी नाजायज होना चाहिए। धर्मांतरण में जोर-जबर्दस्ती या लालच नहीं होना चाहिए।

यह बात मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार ने प्रेसवार्ता में कही। वे आगरा में हुए धर्मांतरण के बारे में जवाब दे रहे थे। वे मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के चिंतन कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उन्होंने कहा धर्म परिवर्तन को लेकर शोर बहुत मचता है। इस पर बड़ी बहस की जरूरत है। हमारा मालिक एक है, हमारे पुरखे एक हैं, हमारी परंपराएं एक है। बस पूजा पद्धति अलग है। जैनमत आया तो उसमें चले गए लोग, बौद्ध धर्म आया तो उसमें चले गए। यही स्थिति अन्य धर्मों के साथ है। धर्मांतरण में किसी भी प्रकार की जोर-जबर्दस्ती नहीं होना चाहिए।

चिंतनकार्यक्रम में तालीम पर दिया जोर-इसके पहलेगीता भवन में आयोजित चिंतन कार्यक्रम में कुमार ने तालीम पर जोर दिया। उन्होंने कहा चार तरह की तालीम जरूरी है। दीन की तालीम ताकि हम सच्चे बनें। दुनियावी तालीम ताकी हम तरक्की करें। तेहजीब की तालीम ताकि हम इंसान बनें, शैतान नहीं। वतन की मोहब्बत की तालीम ताकि हम ईमानवाले बनें। इस दौरान मंच पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) के राष्ट्रीय सहसंयोजक एस.के. मुद्दीन, एमआरएम यूपी के संयोजक खुर्शीद आगा, केंद्रीय हज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष तनवीर अहमद, सिख पंथ के बाली, एमआरएम प्रदेश सहसंयोजक फारूख खान, आमिल शब्बीर हुसैन राकीब, जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मेहरा, एमआरएम जिला संयोजक सैयद अमजद अली मौजूद थे। अाभार इफ्तेखार पठान ने माना।

गीता भवन में संबोधित करते इंद्रेश कुमार मौजूद अन्य।