’जीवदया की भावना से बनते हैं महामानव’
भगवानके सामने बच्चे बनकर ही रहें। इससे उनका स्नेह और प्यार हमें मिलेगा। जीवदया की भावना रखें। ऐसा करने से मानव से महामानव और नर से नारायण बना जा सकता है।
यह बात अभिग्रहधारी राजेशमुनिजी ने रविवार को पूनम विहार कॉॅलोनी में आयोजित धर्मसभा में कही। राजेशमुनिजी राजेंद्रमुनिजी के अट्ठाई तप 15वीं दीक्षा जयंती पर 151 श्रावक-श्राविकाओं ने एकासने किए। धर्मसभा में लता सोनी, शीतल मांडोत, राजकुमार सुराणा, सुमन राठौर राहुल छाजेड़ ने संबोधित किया। राजेशमुनिजी द्वारा विवेचित अंतगढ़ दशा सूत्र पुस्तक का विमोचन किया गया। शीतल मांडोत ने स्तवन गाया। जयंतीलाल मेहता, लोकेश मेहता, विकास पितलिया, अमन राठौर, चंद्रप्रकाश मेहता (रतलाम) मौजूद थे। एकासने का लाभ पूनम विहार गुरु भक्तमंडल ने लिया। संचालन ललित भंडारी ने किया।
अभिग्रहपारणा आज
अभिग्रहधारीराजेशमुनिजी सोमवार सुबह 7 बजे अभिग्रह के लिए निकलेंगे। इसके बाद 10 बजे राजेशमुनिजी राजेंद्रमुनिजी के अट्ठाई तप का पारणा होगा।