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तस्करी की सूचना पर जावरा पुलिस ने वाहन रोका, लाइसेंस व परमिट निकले, दलाल व आरटीओ से की पूछताछ, छोड़ दिया

4 वर्ष पहले
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आरटीओ के साइन कराने दस्तावेज मंदसौर ले जा रहा था दलाल

भास्कर संवाददाता | रतलाम

तस्करी की सूचना पर जावरा पुलिस ने एक वाहन की जांच की तो उसमें लाइसेंस, परमिट, नाम ट्रांसफर सहित अन्य आवेदन निकले। ये एक दलाल मंदसौर ले जा रहा था। पुलिस ने दलाल और आरटीओ से पूछताछ के बाद वाहन छोड़ दिया। जावरा पुलिस को रतलाम से सूचना मिली कि एक वाहन मंदसौर जा रहा है और उसमें तस्करी का सामान है। पुलिस को वाहन का नंबर (एमपी 43 डीपी 0001) बताया जिसके आगे लाला लिखा है। पुलिस चौपाटी पर वाहनों की जांच की। सामने से आ रही गाड़ी को रोका और तलाशी ली तो लाइसेंस परमिट और नाम ट्रांसफर के आवेदन निकले। इसके बाद पूछताछ करने के लिए थाने ले गए। गाड़ी में दलाल रितेश लाला था। उसने बताया वह लाइसेंस, नाम ट्रांसफर, परमिट के आवेदन लेकर आरटीओ के साइन कराने मंदसौर ले जा रहा था। आरटीओ संतोष मालवीय को बुलाया गया। वे थाने आए। उन्होंने पूछताछ की और वाहन को छोड़ दिया।

अवैध सामान ले जाने की सूचना पर जांच की
जावरा सिटी थाना प्रभारी एससी शर्मा ने बताया रतलाम से सूचना आई थी कि एक गाड़ी में अवैध माल मंदसौर जा रहा है। इस पर पुलिस को भेजा था। इसमें से लाइसेंस सहित अन्य आवेदन निकले। करीब 70 आवेदन थे। इसके अलावा कोई अवैध माल नहीं निकला। चूंकि दस्तावेज पर किसी के साइन नहीं थे इससे वैध दस्तावेज नहीं मान सकते। इसलिए छोड़ दिया। यदि आवेदन पर साइन या किसी विभाग की सील लगी होती तो मामला जांच में लेते और आगे कार्रवाई करते।

पूछताछ कर छोड़ दिया
पुलिस ने वाहन पकड़ा था। इसमें आवेदन निकले। आवेदन पर किसी के साइन नहीं थे। वहीं आरटीओ को भी थाने बुलवाकर पूछताछ की गई। पुष्टि होने के बाद छोड़ दिया है। दीपक शुक्ला, प्रशिक्षु आईपीएस व सीएसपी

मैं जानकारी निकलवाती हूं

मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है, मैं जानकारी निकलवाकर घटना का पता करती हूं कि आखिर हुआ क्या है। तन्वी सुन्द्रियाल, कलेक्टर

नई अधिकारी पर प्रभाव दिखाने की कोशिश
नई आरटीओ अधिकारी जया बसावा अभी जॉइन नहीं हुई हैं लेकिन दलालों ने उन्हें अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश शुरू कर दी है। शुक्रवार को मैडम के जॉइन होने की खबर के बाद एक दलाल विकास ने अपनी गाड़ी सेवा में लगाने के लिए आरटीओ ऑफिस तक पहुंचा दी थी। पुराने आरटीओ के खिलाफ एफआईआर होने के बाद गाड़ी हटा दी गई थी।

सरकारी फाइलें ऑफिस से बाहर कैसे आईं
आरटीओ से जुड़ी फाइलें ऑफिस से बाहर कैसे आईं? लाइसेंस व अन्य आवेदन सहित गाड़ी लेकर दलाल साइन कराने क्यों जा रहा था ? क्या प्रभारी आरटीओ ने फाइलें दलाल के जरिये बुलवाई थीं ? क्या अक्सर ऐसा होता है, इनके जवाब न प्रभारी आरटीओ के पास हैं और न ही दलाल के पास। प्रभारी आरटीओ ने तो जानकारी होने से ही मना कर दिया।

200 से ज्यादा फाइलें और 70 से ज्यादा लाइसेंस थे
सूत्रों के मुताबिक दलाल लाला के पास 200 से ज्यादा फाइलें और 70 से ज्यादा लाइसेंस थे। पुलिस ने जब उसे पकड़ा तो ताबड़तोड़ मंदसौर से एक आरटीओ अधिकारी भागे-भागे आए और सांठगांठ करके रितेश को छुड़वाया। कहते हैं इस दौरान 90 हजार रुपए से भी ज्यादा नकदी उसके पास थी। जिस तरह से पुलिस ने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की उससे कई सवाल खड़े हुए हैं।

पुलिस को जानकारी दे दी
दलाल रितेश लाला ने बताया तस्करी की सूचना पर वाहन पकड़ा था लेकिन सूचना गलत निकली। मैंने सारी जानकारी पुलिस को दे दी है। इस आधार पर पुलिस ने मुझे छोड़ दिया।

प्रभारी आरटीओ संतोष मालवीय ने बताया इस घटना की मुझे जानकारी नहीं है। मेरे पास चार जिलों का प्रभार है, सात गाड़ियां हैं, मुझे तो मामले की भी जानकारी नहीं है कि क्या हुआ है। मैं तो उज्जैन में हूं।

थाने में बयान देने वाले आरटीओ बोले-घटना ही नहीं पता
मुझे मामले की जानकारी नहीं है
एसपी अमित सिंह ने बताया मामले की जानकारी मुझे नहीं है। आप जावरा सीएसपी से पूछें, वे ही बता पाएंगे।

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