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आदर्श गांव में सांसद एक बार गए, वादों को ग्रामीणों ने बताया ख्याली पुलाव

4 वर्ष पहले
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जावरा तहसील का एक मात्र आदर्श गांव कलालिया। उन्नत किसानों की 5 हजार आबादी वाले गांव को 8 महीने पहले सांसद सुधीर गुप्ता ने गोद लिया था। थोड़े दिन बाद वे गांव पहुंचे। विभागीय अफसरों की बैठक ली और चहुंमुखी विकास के वादे किए। तब 30 लोगों को आश्वासन दिया था कि पशुपालन के लिए बैंकों से लोन दिलाएंगे। बैंक अधिकारियों से अनुशंसा ऐसे की जैसे हफ्तेभर में लोन मिल जाएगा और किसान दूध की नदियां बहा देंगे जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ।

जिन किसानों ने पशुपालन लोन के फॉर्म भरे थे, उन्हें बैंकों ने उलटे पैर लौटा दिया। आवेदनकर्ता विनोद पांडेय ने बताया मुझ सहित सभी को यह कहकर लोन नहीं दिया कि लक्ष्य पूरा हो गया, अगली बार नंबर आएगा। कुछ लोगों को तो अपात्र बता दिया। किसान आंदोलन के दौरान बलवंतसिंह चंद्रावत पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुए और सलाखों के पीछे रहे तब गांव चर्चा में आया। हाल ही में भाजपा ने किसान संदेश यात्रा निकाली लेकिन गोद लेने वाले सांसद गांव नहीं आए। भास्कर ने गली-चौपाल पहुंचकर हकीकत जानी तो कई समस्याएं सामने आईं।

तहसील मुख्यालय से फोरलेन रिंगनोद फंटा होकर कलालिया की दूरी 17 किमी है। अरनियापिथा मंडी से झालवा होकर केवल 12 किमी है लेकिन बारिश में ग्रामीण इस रूट से नहीं जा सकते। कलालिया से निकलते ही झालवा रास्ते पर पिंगला नदी है। जहां पुल नहीं होने से रास्ता बंद हो जाता है। सालों से ग्रामीण पुल और पक्के रोड की मांग कर रहे हैं। नदी के पार एक हजार से ज्यादा किसानों की खेती है, लेकिन जा नहीं पाते। गलियों में सीसी रोड है लेकिन पांच साल से पहले के पुराने रोड उखड़ने लगे हैं। सफाई में भी गांव पिछड़ा है। जपं सदस्य बलवंतसिंह चंद्रावत बताते हैं सांसद ने गांव गोद लिया लेकिन ध्यान नहीं देकर उपेक्षा की। किसानों की परेशानी नहीं सुनी वे गांव का विकास क्या करवाएंगे। जितेंद्र गोस्वामी यहीं नहीं रुके, उनका कहना है सांसद केवल एक बार गांव आए। उसमें भी जो वादे किए वे पूरे नहीं हुए। उन्हें गांव आने की फुर्सत नहीं और जनपद में सरपंच-जनपद सदस्यों की कमिशनबाजी का विवाद सुलझाने का समय मिल गया। हालांकि सांसद प्रतिनिधि पवन जैन ने कहा सांसद के कार्यक्षेत्र में 7 विधानसभा हैं। अन्य जगह व्यस्त होने से यहां नहीं आ सके। सरपंच शांतिदेवी व उनके पति राधेश्याम सुनारिया का कहना है तीन साल में तीस लाख से ज्यादा के काम हुए। पुलिया व सरकारी योजनाओं का ग्रामीणों को लाभ दिलाने में जनप्रतिनिधियों का सहयोग जरूरी है जो पूरी तरह नहीं मिल रहा।

सांसद अभी बाहर है बात नहीं हो सकती
गांव की स्थिति को लेकर सांसद को कई बार संपर्क करना चाहा लेकिन फोन रिसीव नहीं किया। उनके निज सचिव शोरित सक्सेना का कहना है कि सांसद अभी बाहर हैं, बात नहीं हो सकती। सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौधरी का कहना है गांव को गोद लेने का मतलब लोगों को जागरूक करना, सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने की प्राथमिकता है। छुटपुट निर्माण नहीं हुए तो दिखवाएंगे। पुलिया व लोन संबंधी मामले में सांसद को अवगत करवाते हुए निराकरण करवाने का प्रयास किया जाएगा।

कलालिया-झालवा रास्ते पर पिंगला नदी में सालों से पुलिया निर्माण की मांग लंबित है लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।

वादा अधूरा
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