पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • 1600 की स्क्रीनिंग, पहली रिपोर्ट निगेटिव

1600 की स्क्रीनिंग, पहली रिपोर्ट निगेटिव

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
स्वाइनफ्लू के मामले में जिला हाई अलर्ट पर है। सर्दी-खांसी और बुखार के 200 से अधिक मरीजों की गुरुवार को स्क्रीनिंग की गई। अब तक जिला अस्पताल में 1600 मरीजों की स्क्रीनिंग हुई। 6 संदिग्ध में से 3 के स्वाब नमूने जबलपुर लैब भेजे गए थे। एक की रिपोर्ट गुरुवार को आई जो निगेटिव है।

जावरा की जिस महिला को मंगलवार को अस्पताल में भर्ती किया था, उसके स्वाब की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। महिला को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी है। बुधवार को भर्ती हुए दो अन्य मरीजों की स्वाब रिपोर्ट आना बाकी है। जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में गुरुवार को भी दो संदिग्ध मरीज भर्ती किए गए।

हौवाज्यादा, मरीज कम- जिलेमें स्वाइन फ्लू पॉजिटिव (सी कैटेगरी) का एक भी मामला नहीं मिला। लेकिन डर साफ देखा जा सकता है। जिला अस्पताल में लगभग हर दूसरा शख्स मुंह पर कपड़ा या मास्क लगाए देखा जा सकता है। यूं तो जिला अस्पताल में नाक-मुंह ढंकना सतर्कता के लिए ठीक है, लेकिन लोगों में घबराहट का माहौल ज्यादा है।

हमारेलिए यह पॉजिटिव- 2013में प्रदेश में स्वाइन फ्लू को स्वास्थ्य विभाग के जिस अमले ने मुस्तैदी से कंट्रोल किया था उसका श्रेय फिलहाल रतलाम कलेक्टर डॉ. संजय गोयल को है। डॉ. गोयल तब स्वास्थ्य संचालनालय में आईडीएसपी सेल के संचालक थे। उन्हीं के निर्देशन में स्वाइन फ्लू को कंट्रोल करने का ऑपरेशन चला था। उन्हें इस मामले में खासा अनुभव है।

होम्योपैथीदवा का मुफ्त डोज-कॉलेज रोडके सिटी मेडिकोज पर स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए मुफ्त डोज दिए जा रहे हैं। मेडिकोज संचालक डाॅ. शांता जैन के अनुसार यह डोज प्रति सप्ताह एक बार दिया जाता है।

आयुर्वेदमें भी है उपचार-वैद्य डॉ.र|दीप निगम के अनुसार आयुर्वेद में स्वाइन फ्लू के सटीक उपचार हैं। किसी भी कैटेगरी के स्वाइन फ्लू से निपटने रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि के लिए आम नागरिक आयुर्वेद के किसी भी जानकार की मदद से बीमारी से निजात पा सकते हैं।

स्वाइन फ्लू

{अनुभवी डॉक्टर्स का मानना है स्वाइन फ्लू पॉजिटिव मामलों में 92 प्रतिशत में साधारण उपचार से मरीज ठीक हो जाता है।

{यदि आपको सर्दी, खांसी, बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ है तो जरूरी नहीं यह स्वाइन फ्लू ही हो। ऐसे अधिकतर मामलों में निमोनिया, टीबी, एलर्जी या ठंडी हवा के संपर्क में आने से फेफड़ों को हुए नुकसान के कारण सामने रहे हैं।

{हालांकि ऐसे मरीजों को लापरवाही नहीं बरतते हुए अनुभवी डॉक्टर्स को अपना चैकअप जरूर कराना चाहिए।

{स्वाइन फ्लू कैटेगरी-ए में सर्दी, जुकाम, हल्का बुखार, उल्टी-दस्त और बदन दर्द से पीड़ित मरीज को रखा जाता है। इन्हें लक्षणों के अनुसार दवा देने और आराम करने को कहा जा रहा है।

{ऐसे मरीजों को भीड़ वाले स्थान से दूर रहने, 24 से 48 घंटे तक डॉक्टर्स की निगरानी में रहने की सलाह दी जाती है। ऐसे मरीजों की स्वाइन फ्लू जांच नहीं कराने के आदेश जिला मुख्यालयों को दिए गए हैं।

^बतौर सतर्कता सामान्य लक्षणों वाले मरीजों की भी स्क्रीनिंग की जा रही है। जिले में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव का एक भी मामला नहीं मिला। डॉ.जी.आर. गौड़, नोडल अधिकारी