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ट्रेन बसों में नहीं मिली पैर रखने की जगह

7 वर्ष पहले
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चेहल्लूम के मुख्य आयोजन मातम-ए-खंदक में शामिल होने के बाद शुक्रवार रात से ही जायरीनों ने घर वापसी शुरू कर दी। शनिवार सुबह तक 75 हजार जायरीन जा चुके थे। दिनभर में करीब एक लाख से ज्यादा जायरीन विभिन्न साधनों से गए। अभी भी हजारों टेकरी शरीफ पर ही रुके हैं। शनिवार दिनभर ट्रेनें, बसें, जीप समेत अन्य यात्री वाहन खचाखच भरे रहे। इनमें पैर रखने की जगह नहीं थी। यात्रियों ने दरवाजों पर लटकते हुए सफर तय किया।

रेलवे स्टेशन से मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह से शाम तक करीब 25 हजार यात्री विभिन्न स्थानों के लिए रवाना हुए। इससे रेलवे को सवा चार लाख रुपए की आय हुई। शुक्रवार रात का आंकड़ा अलग है। शनिवार दिनभर इंदिरा गांधी मुख्य बस स्टैंड, उज्जैन बायपास तिराहे, बायपास के हुसैन टेकरी रोड चौराहे, ताल रोड चौराहे से करीब 30 हजार से ज्यादा यात्रियों ने बस जीप आदि वाहनों में सफर किया। हजारों जायरीन निजी वाहनों से भी गए। कई अभी भी रुके हैं जो यात्री वाहनों में भीड़ कम होने के इंतजार में हैं। रविवार-सोमवार तक रवाना होंगे।

टेम्पो-मिनीडोरवालों की चांदी-हुसैन टेकरीसे स्टेशन और बस स्टैंड के बीच चलने वाले टेम्पो, मिनीडोर वालों की चांदी रही। गुरुवार शाम से ही सारे ऑटो, टेम्पो, मिनीडोर ओवरलोड चल रहे थे। शनिवार को जायरीनों की वापसी के दौरान तो इन्होंने टेकरी से स्टेशन बस स्टैंड तक 25-25 से अधिक चक्कर लगाए। आॅटो चालक अशोक वर्मा ने बताया शुक्रवार दिन और रात 3 बजे तक सेवा दी। सुबह 6 बजे उठकर काम पर लगे तो शाम हो गई। अच्छी आमदनी हुई।

सुविधाघर की कमी से परेशान हुए यात्री

स्टेशनपर प्रशासन की ओर से अतिरिक्त सुविधाघर की व्यवस्था की जाना थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में स्टेशन के सुविधाघर कम पड़ गए खासकर महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ा। नपा सीएमओ अशोक शर्मा ने बताया भविष्य में सुविधाओं में इजाफा करेंगे।

ट्रेन में जगह नहीं मिली तो यात्री इस तरह गेट पर लटकते हुए गए।

{ 25 हजार जायरीन ट्रेन से, 30 हजार से अधिक बस, जीप से तथा हजारों निजी वाहनों से गए

परेशानी