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जिनवाणी का लाभ सभी जीवों को मिलता है

5 वर्ष पहले
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जावरा | वाणी दो प्रकार की होती है। एक जनवाणी, दूसरी जिनवाणी। जनवाणी रंजन और मनोरंजन के लिए होती है, लेकिन जिनवाणी आत्मा के मंथन के लिए होती है। जिनवाणी का श्रवण करना दुर्लभ है। जिनवाणी अर्थात जिनेश्वर देवों की वाणी होती है। जिनकी वाणी का लाभ सिर्फ मनुष्य को ही नहीं मिलता। जबकि जो इसका श्रवण करता है उसे भी मिलता है। यह बात जैन श्रमणी निर्देशिका श्रुतनिधिजी ने गुरुवार को रंगरेज गली स्थित जैन दिवाकर भवन में धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा जिनवाणी सुनते-सुनते जीव समस्त दु:खों से मुक्त होकर शाश्वत सुख प्राप्त करता है। जैन श्रमणी प्रमुखा निधि ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। धर्मसभा में सुशील चपड़ौद, सुभाष टुकड़िया, राकेश मेहता, अंकित मेहता, पारस गादिया, मनोहरलाल चपड़ौद आदि मौजूद थे। शुक्रवार को आचार्य प्रवर पाश्वचंदजी, प्रवचन प्रभावक डॉ. पदमचंदजी, जयेंद्रमुनिजी, धुरंदरमुनिजी, कलशमुनिजी, पुरुदर मुनिजी आदि ठाणा 6 के प्रवचन सुबह 9 से 10 बजे तक जैन दिवाकर भवन पर होंगे।

निधिजी व श्र्रुतनिधिजी।

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