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झाबुआ जिला हाईरिस्क जाेन में छिड़काव के लिए दवाई नहीं

7 वर्ष पहले
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झाबुआजिले के हाई रिस्क जोन में होने के बावजूद मलेरिया रोग की रोकथाम के लिए शासन-प्रशासन संजीदा नहीं है। जिसका उदाहरण है कि चिह्नित गांवों में दूसरे चरण के छिड़काव के लिए सिंथेटिक पायराथ्राइड 5 प्रतिशत दवाई ही नहीं पहुंचाई गई। मामले में जिला मलेरिया अधिकारी ने संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल को चिट्ठी लिखकर अवगत भी कराया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

गौरतलब है कि जिले के 6 विकासखंड में चयनित 278 गांवों को स्वास्थ्य विभाग ने हाई रिस्क श्रेणी में डाल रखा है। इन गांवों में दो चरण के छिड़काव के लिए कुल 16 हजार 807 किलोग्राम सिंथेटिक पायराथ्राइड 5 प्रतिशत दवाई की जरूरत थी। इसकी मांग मलेरिया माह के पहले ही भेज दी गई थी। दवाई छिड़काव का पहला चरण 16 जून से 31 जुलाई तक चला। कुल 7 हजार 506 किलोग्राम दवाई का छिड़काव हुआ। वहीं दूसरे चरण का छिड़काव 1 सितंबर से 15 अक्टूबर तक किया जाना था, परंतु ऐसा नहीं हो सका। क्योंकि जिले को दूसरे चरण के लिए दवाई ही उपलब्ध नहीं कराई गई। नतीजतन मलेरिया के केस लगातार बढ़ रहे हैं और स्थिति दिन दिन गंभीर होती जा रही है।

एक नजर

799गांव

1065464 जिले की आबादी

278 हाई रिस्क ग्राम

448211 प्रभावित आबादी

जिम्मेदार बोले-

^यहबात सही है कि 1 सितंबर से प्रारंभ हुए द्वितीय चक्र के छिड़काव के लिए लिए जिले में दवा उपलब्ध नहीं हो पाई। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत करा दिया था। फिलहाल फोकल स्प्रे कर रहे हैं। डॉ.एससी बर्वे, जिलामलेरिया अधिकारी, झाबुआ

किस विकासखंड में कितने हाई रिस्क ग्राम

विकासखंड हाई रिस्क गांव आबादी

राणापुर 34 65323

रामा 50 69126

कल्याणपुरा 56 112356

मेघनगर 52 70125

थांदला 59 82156

पेटलावद 27 49125

योग 278 448211

जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ओपीडी के बाहर लाइन में खड़े मरीज।