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बावन जिनालय के 42 शिखरों पर किया ध्वजारोहण

7 वर्ष पहले
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चातुर्मास पूर्ण होने पर साध्वीमंडल को दी विदाई

श्रीऋषभदेव बावन जिनालय में कार्तिक पूर्णिमा के उपलक्ष्य में जिनालय के 42 शिखरों पर विधि-विधान के साथ ध्वजारोहण किया गया। आदिनाथ भगवान की भव्य रथ यात्रा के साथ श्री शत्रुंजय (सिद्धाचल) तीर्थ की भाव यात्रा एवं देववंदन किए गए। मंदिर में प्रात: साढ़े 6 बजे श्री भक्तामर स्त्रोत एवं गुरुगुण इक्कीसा पाठ का किया गया। पश्चात मूलनायक भगवान की केशर पूजन हुई। विधिकारक ओच्छबलाल जैन एवं निखिल भंडारी ने संगीतमय श्री सत्तरभेदी पूजन पढ़ाई गई। पूजन के बाद लाभार्थी परिवारों द्वारा अपने सिर पर ध्वजाएं रखकर जिनालय की तीन प्रदीक्षणा पूरी की। बावन जिनालय के मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान के मुख्य शिखर एवं कलश पर अष्टप्रकारी पूजन संजय मेहता एवं अनिल रुनवाल ओम पुण्याहां-पुण्याहां के मंत्रों के साथ कराई।

आदिनाथभगवान की निकली रथ यात्रा

प्रात:दस बजे बावन जिनालय से श्री आदिनाथ भगवान की भव्य रथ यात्रा निकली। रथ में मंजुला सेठिया प्रभुजी को लेकर बैठी थीं। रथ के सारथी सार्थक एवं शाश्वत मेहता थे। दोनों ओर विधि सेठिया एवं हिया भंडारी चंवर ढुला रही थीं। प्रभुजी के रथ को मनन रुनवाल, रोहित शर्मा, सुजल कोठारी, संस्कार मेहता, प्रितेश मेहता, गौतम संघवी, अमित मेहता, दिलीप सेठिया, पलाश प्रधान द्वारा खींचा जा रहा था। युवा वर्ग जय-जय श्री आदिनाथ के जयकारे लगाकर चल रहे थे। श्राविकाएं मंगल गीत गा रही थीं। विभिन्न मार्गों से होकर रथ यात्रा बावन जिनालय पहुंची, जहां गणधर मंदिर की वार्षिक बोलियां समाजजनों द्वारा बोली गई।

साध्वी मंडल ने चातुर्मास स्थल परिवर्तन किया।

राजेंद्र भवन में रखे गए समारोह में हर कोई भावुक नजर आया

राणापुर| देखतही देखते आप लोगों के साथ चार माह बीत गए। हमने अपनी ओर से पूरा प्रयास किया कि आप जिनवाणी का श्रवण कर उसे अंगीकार करें।

यह बात साध्वी श्री भक्तिरसा श्रीजी ने कही। वे चातुर्मास समापन पर राजेंद्र भवन में रखे गए विदाई समारोह में बोल रही थीं। साध्वीश्री के प्रवचन सुन हर कोई भावुक हो गया। साध्वी श्री अमृतरसाश्रीजी ने कहा कि समय बीत जाता है किंतु उसमें किए गए कार्य लम्बे समय तक अपनी याद बनाए रखते हैं। पूरे चातुर्मास के दौरान जिस उत्तम भावना से कार्य किया वह हमें हमेशा याद रहेगा। साध्वी मंडल एवं श्री संघ ने एक दूसरे से क्षमा याचना की। सी