िबन पानी-बिजली कैसे करें सिंचाई
फसलों पर फिर संकट। डीजल पंप लगाकर पानी देने को मजबूर कृषक, बिजली कटौती और वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से परेशानी
एकतरफबारिश की बेरूखी, दूसरी तरफ बिजली कटौती। ऐसे में पानी मांग रही फसलों को बचाने के लिए किसान मशक्कत कर रहे हैं। कहने को ग्रामीण क्षेत्र में 24 में से 15 घंटे बिजली मिल रही है लेकिन कटौती उसमें भी खलल डाल रही है। वोल्टेज के उतार-चढ़ाव ने दोहरी परेशानी खड़ी करने का काम किया है जिससे कई किसानों की मोटर भी जल चुकी है। किसान अब बिजली कंपनी को कोस रहे हैं।
बारिश ने एक बार मुंह मोड़ा तो अब तक लौटकर नहीं आई। तीखी धूप फसलों को सूखा रही है। फसलें एक पानी और मांग रही है, लेकिन बादल पसीज नहीं रहे। पानी मांग रही फसलों को किसान अपने स्तर से सींच रहा है। लेकिन पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से फसल खराब होने का अंदेशा भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध सप्लाय नहीं होने से काफी दिक्कतें हो रही हैं। सिंचाई के दौरान ही कई बार बिजली गुल हो जाती है। ऐसे में कई लोगों की मोटर खराब हो चुकी है। ज्यादातर किसान तो डीजल पंप लगाकर फसलों को पानी दे रहे हैं। इससे रोजाना डीजल के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। पेटलावद तहसील के ग्राम करवड़, करडावद, टेमरिया, खामड़ीपाड़ा, रामगढ़, देहंडी, केसरपुरा आदि के किसान भी फसल को लेकर चिंता में है। जबकि रायपुरिया, पिटोल, थांदला के ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही स्थिति है।
बिलपूरा भरते हैं, बिजली भी पूरी मिलनी चाहिए
करवड़के किसान नरसिंह गामड़, जगदीश पोरवाल, विनोद केरावत, शंभुलाल पाटीदार जैसे कई कृषक हैं जो अपनी फसल को बचाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। उन्होंने बताया सभी बिजली का बिल समय पर पूरा भरते हैं। इसलिए बिजली भी पूरी मिलनी चाहिए। बिजली नहीं मिलने से कृषकों में आक्रोश है।
करवड़ क्षेत्र के किसान डीजल पंप से कर रहे हैं सिंचाई।
लोड बढ़ते ही गुल हो जाती है बिजली
बिजलीकंपनी को सिंचाई के लिए 10 घंटे बिजली देना है। अगर किसानों की माने तो इतनी बिजली भी नहीं मिल रही। बिजली कंपनी का कहना है ट्रांसफार्मर में लोड बढ़ने के कारण लाइन ट्रिप हो जाती है। यह स्थिति तब बनती है जब कई मोटरें एक साथ चल रही हो। कई बार लाइन दुरुस्त करने के लिए परमिट भी लेना पड़ता है।
हमनिर्बाध बिजली दे रहे हैं
^लोडबढ़ने के कारण भी बिजली गुल हो जाती है। ग्रामीण क्षेत