विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं, मरीज परेशान
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को रोज इस तरह घंटों लंबी लाइन लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
गोपाल मैलाना| आलीराजपुर
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। कई पद रिक्त पड़े हैं। इसके अभाव में कई बार मरीजों को समय पर उपचार भी नहीं मिल पाता। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य भी जिले का दौर कर हालात देख चुके हैं, बावजूद स्टाफ चिकित्सकों को बढ़ाने की ओर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
आलीराजपुर को जिला बने सात वर्ष हो चुके हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी पर नहीं आई है। आज भी चिकित्सकों के अभाव में जिला अस्पताल में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। चिकित्सकों की कमी की समस्या सबके सामने है, लेकिन निराकरण कोई नहीं कर पा रहा। प्रभारी मंत्री ने भी खाली पड़े विशेषज्ञों के पदों पर भर्ती में रुचि नहीं दिखाई। जिला अस्पताल में डेढ़ दर्जन से अधिक प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। वर्तमान में यहां पर प्रथम श्रेणी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. प्रकाश ढोके, शल्य विशेषज्ञ डॉ. आर. मंडल, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र मंडलोई तथा आर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. केसी गुप्ता है। जबकि अस्पताल में एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। इस वजह से महिला मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट, निश्चेतना, नेत्र रोग, ईएनटी, रेडियोलॉजिस्ट, क्षय रोग तथा दंत रोग विशेषज्ञ के पद रिक्त पड़े हंै। आश्चर्य की बात है कि जिला अस्पताल में सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक का पद भी खाली है।
जिला अस्पताल में 19 प्रथम श्रेणी डॉक्टरों की कमी चल रही है। ये सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद है। इन पदों पर भर्ती नहीं किए जाने के कारण जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों का फायदा नहीं मिल पा रहा है। जिले के सैकड़ों मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से चेकअप करवाने के लिए गुजरात के दाहोद, वडोदरा, अहमदाबाद तथा इंदौर आदि के चक्कर लगाना पड़ते हैं। जोबट, सोंडवा, उदयगढ़, चंद्रशेखर आजाद नगर, नानपुर तथा आंबुआ आदि स्थानों से रोजाना मरीजों को जिला अस्पताल रैफर किया जाता है। जिले के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी जनरल ऑपरेशन नहीं किए जा रहे हैं। माइनर ऑपरेशन वाले मरीजों को भी आलीराजपुर रैफर कर दिया जाता है। इससे जिला अस्पताल के डॉक्टरों का वर्कलोड बढ़ जाता है।
मशीनहै पर नहीं होती सोनोग्रॉफी
स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. अनुसुइया गवली के स्थानांतरण के बाद से ही जिला अस्पताल में सोनोग्रॉफी होना बंद हो गई है। यह स्थिति करीब एक वर्ष से बनी हुई है। इंदौर जेडीयू ने जनवरी माह में एक आदेश निकाला था कि झाबुआ के डॉ. एके दुबे प्रत्येक शनिवार को आलीराजपुर पहुंचकर सोनोग्रॉफी करेंगे। लेकिन अब तक एक भी शनिवार को डॉक्टर साहब यहां नहीं आए। इसलिए मजबूरन मरीजों को सोनोग्रॉफी करवाने के लिए गुजरात इंदौर जाना पड़ रहा है।
अस्पतालमें पदों की स्थिति
श्रेणीवारपद स्वीकृत कार्यरत रिक्त
प्रथमश्रेणी 23 04 19
द्वितीय श्रेणी 22 14 08
तृतीय श्रेणी 94 57 37
चतुर्थ श्रेणी 39 12 27
योग 178 87 91